
Dalit Woman Police Brutality: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक दलित घरेलू महिला कर्मचारी के साथ कथित पुलिस प्रताड़ना का मामला सामने आने के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया है। पीड़िता बिंदु ने दावा किया है कि उसे चोरी के एक झूठे आरोप में घंटों थाने में बिठाए रखा गया, पानी तक नहीं दिया गया और जबरन कबूलनामे के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। यही नहीं, जब वह न्याय की उम्मीद लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) पहुंचीं, तो वहां भी उसे अपमान और उपेक्षा का सामना करना पड़ा।
पीड़िता बिंदु, जो पनवूर की रहने वाली हैं और घरेलू कामकाज कर परिवार चलाती हैं, ने बताया कि 23 अप्रैल को उन्हें पेरूर्काडा पुलिस स्टेशन में बुलाया गया था। उस घर के मालिक ने चोरी का आरोप लगाया था, जहां वह काम करती थीं। बिंदु का कहना है कि उन्हें करीब 20 घंटे थाने में बैठाए रखा गया, न पानी दिया गया, न परिवार से संपर्क करने दिया गया, उल्टा पुलिस ने उनकी बेटियों को जेल भेजने की धमकी दी।
अगले दिन सामने आया कि चोरी हुआ गहना उसी घर में मिल गया था, जिसने बिंदु पर आरोप लगाया था। लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने न तो तुरंत एफआईआर हटाई और न ही उन्हें जानकारी दी। उल्टा, थाने से छोड़ते समय बिंदु को धमकाया गया कि वह दोबारा अंबालामुक्कु या कोवडियार जैसे इलाकों में नजर न आएं। थाने से बाहर निकलने पर ही उनके पति ने बताया कि गहना घर में ही मिल चुका है।
बिंदु का आरोप है कि थाने में एक अधिकारी ने उनसे कहा कि पीने का पानी चाहिए तो वॉशरूम से पी लो। इस घटना के बाद विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने सरकार और गृह मंत्रालय पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पुलिस बल का राजनीतिक इस्तेमाल और लापरवाही ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और विभागीय जांच की मांग की है।
बिंदु ने यह भी कहा कि जब वह शिकायत लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय गईं, तो वहां भी उन्हें अनदेखा किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव पी. सासी ने शिकायत पढ़े बिना ही किनारे रख दी और कहा कि अगर कुछ कहना है तो कोर्ट में कहो। हालांकि सासी ने मीडिया से कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने जांच के निर्देश दिए और संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।
बिंदु का कहना है कि वह कार्रवाई का स्वागत करती हैं, लेकिन जिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें अपशब्द कहे और पीने के पानी से भी वंचित रखा, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने उस महिला पर भी केस दर्ज करने की मांग की है, जिसने झूठा आरोप लगाया था। इस पूरे मामले ने अब जातीय भेदभाव, मानवाधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। दलित संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया है और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है।
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