
अहमदाबाद। बैंक ग्राहकों से कार्ड शुल्क, एसएमएस शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क सहित कई तरह से अतिरिक्त पैसे वसूलते हैं, यह कोई नया आरोप नहीं है। इसके खिलाफ कई ग्राहक आक्रोश व्यक्त करते रहे हैं। पहले से ही अतिरिक्त वसूली से परेशान यूनियन बैंक के एक ग्राहक का गुस्सा तब और भड़क गया जब उसकी फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज पर ज्यादा टैक्स काटा गया। बिना कुछ सोचे-समझे वह सीधे बैंक शाखा पहुंचे और मैनेजर की कॉलर पकड़कर हाथापाई करने लगे। यह घटना गुजरात के अहमदाबाद में हुई।
ग्राहक ने वस्त्रापुर शाखा में एक निश्चित राशि फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा की थी। बैंक हर साल एक निश्चित ब्याज दर देते हैं। ग्राहक का आरोप है कि फिक्स्ड डिपॉजिट करते समय बताए गए नियम और अब बैंक द्वारा काटे जा रहे टैक्स में अंतर था। इससे ग्राहक का पारा चढ़ गया। ग्राहक का कहना है कि उसने अपनी मेहनत की कमाई बैंक में जमा की थी और TDS के नाम पर उससे ज्यादा टैक्स काटा जा रहा है।
5 दिसंबर को अपनी पत्नी के साथ वस्त्रापुर स्थित यूनियन बैंक शाखा पहुंचे ग्राहक सीधे मैनेजर के कमरे में गए और अतिरिक्त टैक्स कटौती पर सवाल उठाया। मैनेजर ने टैक्स कटौती के नियम समझाने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए ग्राहक का पारा और चढ़ गया। वह खड़े होकर मैनेजर की कॉलर पकड़कर हाथापाई करने लगे। दोनों के बीच बैंक शाखा में कुछ देर तक धक्का-मुक्की हुई। कई लोगों ने इसका वीडियो बनाया।
ग्राहक का गुस्सा बीच-बचाव करने आए अन्य कर्मचारियों पर भी उतरा। इस दौरान ग्राहक की पत्नी ने दोनों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन मामला बिगड़ने के कारण वह कुछ नहीं कर सकीं। घटना के बाद बैंक कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्राहक को हिरासत में ले लिया।
बैंक मैनेजर ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने शिकायत में कहा कि RBI के नियमों के अनुसार TDS काटा गया है। इसमें बैंक कुछ अतिरिक्त नहीं कर सकता। ग्राहक शाखा में आकर कर्तव्य में बाधा डाली और हाथापाई की। ग्राहक को TDS के बारे में बताया गया था। काटे गए टैक्स को इनकम टैक्स रिटर्न के समय वापस लिया जा सकता है। लेकिन ग्राहक ने जानबूझकर हाथापाई की।
शिकायत मिलने पर पुलिस ने बैंक के सीसीटीवी फुटेज की जांच की और ग्राहक को गिरफ्तार कर लिया। भारतीय दंड संहिता की धारा 115-2, 221, 296 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब बैंक ब्याज और टैक्स पर चर्चा हो रही है। यह भी आरोप लग रहा है कि बैंक हर बार ग्राहकों को कुछ बातों की सही जानकारी नहीं देते। वे पहले फायदे बताते हैं और बाकी बातें छिपाते हैं। कोई सवाल पूछने पर कहते हैं कि आपने शर्तों पर हस्ताक्षर किए हैं।
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