सहस्त्रताल में 4 महिलाओं सहित 5 पर्वतारोहियों की मौत, 22 फंसे, सभी को हेलीकॉप्टर से निकाला बाहर

Published : Jun 05, 2024, 08:55 PM ISTUpdated : Jun 06, 2024, 08:33 AM IST
Mountaineers

सार

अचानक मौसम खराब होने से उत्तराखंड के सिल्ला कुशकल्याण सहस्त्रताल ट्रैक पर 5 पर्वतारोहियों की मौत हो गई है। वहीं ट्रैकिंग करने पहुंचे 22 सदस्यीय दल को हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

देहरादून. उत्तराखंड में अचानक मौसम खराब हो जाने के कारण 4 महिलाओं सहित पांच पर्वतारोहियों की मौत हो गई है। वहीं करीब 22 पर्वतारोही फंस गए थे। सभी को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इसके लिए वायु सेना सहित राहत एवं बचाव दल ने हर संभव प्रयास किया।

वायु सेना ने ऐसे किया रेस्क्यू

जानकारी के अनुसार करीब 11 ट्रैकर्स वायु सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा नटीण हैलीपैड लाये गये। सिविल हैलीकॉप्टर के माध्यम से 8 ट्रैकर्स को सहस्त्रधारा देहरादून छोड़ा गया। हालांकि 3 ट्रैकर्स अभी नटीण में हैं, जिन्हे जिला मुख्यालय लाया जा रहा है। 2 ट्रैकर्स ट्रैक कर सिल्ला गांव पहुंच गये हैं। जिन्हें बचाव दल एवं एम्बुलेंस से भटवाड़ी होते हुए जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी लाया जा रहा है। दोनों की स्थिति सामान्य है। सेना के चीता हेलीकॉप्टर के माध्यम से 05 शवों को नटीण हैलीपैड लाया गया। इन शवों को जिला चिकित्सालय, उत्तरकाशी लाया जा रहा है। जहां पर पचनामा आदि कार्यवाही की जायेगी।

वन विभाग की टीम भी तैनात

खोज एवं बचाव अभियान के लिए घटना स्थल के लिए रवाना किये गये वन विभाग के 10 सदस्य, 02 राजस्व उपनिरिक्षक व 02 होमगार्ड सहित ग्राम सिल्ला के कुछ लोग ट्रैक मार्ग में हैं। उत्तरकाशी से एसडीआरएफ के 06 जवानों को टिहरी जिले के पिनस्वाड ग्राम से घटना स्थल पर पहुंचने हेतु रवाना किया गया है। बूढा़केदार-पिनस्वाड ग्राम टिहरी से घटना स्थल पर ट्रैकिंग मार्ग की दूरी लगभग 7 किमी कम है। घनसाली से वन विभाग के 03 एवं 01 स्थानीय निवासी घटना स्थल हेतु रवाना हुये हैं।

एसडीआरएफ ने भी किया रेस्क्यू

जौलीग्रांट से एसडीआरएफ उच्च हिमालयन रेस्क्यू टीम को 02 प्राईवेट हैलकॉप्टर के माध्यम से क्षेत्र की रेकी व राहत बचाव कार्यों हेतु भेजा गया था। जिनके द्वारा दिन भर हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग किया गया। रेस्क्यू अभियान के लिए बैकअप के तौर पर नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के कुल 05 पर्वतारोही दल लाटा गांव में तैनात किए गए है। इस अभियान में सेना के दो चीता हेलीकॉप्टर द्वारा जिले के मातली एवं नटीण हेलीपैड को बेस बनाकर रेस्क्यू कार्य किया गया तथा 02 सिविल हैलीकॉप्टर द्वारा रेस्क्यू किए गए ट्रैकर्स को नटीण से सहस्त्रधारा देहरादून भेजा गया। जबकि सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

सेना का सहयोग लिया

हेली सेवाओं के संचालन में मातली हैलीपैड में आईटीबीपी एवं हर्षिल में सेना का सहयोग लिया गया। आईटीबीपी मातली से भी एक डॉक्टर एवं सीओ, के नेतृत्व में 14 जवान घटना स्थल हेतु रवाना किए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, भटवाड़ी को रेस्क्यू अभियान के बेस अस्पताल के रूप में एक्टिव करने के साथ ही लाटा गॉंव में भी चिकित्सक टीम तैनात की गई थी। जिला मुख्यालय पर जोशियाडा हेलीपैड को एक्टिव कर अग्निशमन टीम की तैनाती की गयी है। मातली हैलीपैड त्वरित कार्यवाही दल एनडीआरएफ की तैनाती की गयी है। नटीण हैलीपैड पर समन्वय हेतु खण्ड विकास अधिकारी व नायब तहसीलदार तैनात किए गए हैं। मौसम खराब होने के कारण आज हैली रेस्क्यू कार्य रोक दिया गया है कल सुबह फिर से हैली रेस्क्यू अभियान शुरू किया जाएगा।

इस रेस्क्यू अभियान में डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी, मुख्य विकास अधिकारी जय किशन, अपर जिलाधिकारी रजा अब्बास, उप जिलाधिकारी भटवाडी बुजेश कुमार तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस रावत, जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी, आपदा प्रबन्धन अधिकारी देवेन्द्र पटवाल सहित अन्य अधिकारी तड़के से ही आपातकालीन परिचालन केन्द्र में उपस्थित रहते हुये रेस्क्यू कार्य के निर्देशन, निगरानी, समन्वय में जुटे रहे।

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