Vande Bharat Record: कैसे एक गलती ने वंदे भारत का रिकॉर्ड बना दिया? जानिए 28 घंटे की यात्रा का सच

Published : Oct 08, 2025, 02:10 PM IST
Vande Bharat Train

सार

Vande Bharat Record: आख़िर कैसे देश की शान मानी जाने वाली वंदे भारत ट्रेन ने एक तकनीकी गलती के चलते बनाया ऐसा रिकॉर्ड, जिसे सुनकर रेलवे अधिकारी भी रह गए हैरान? क्या ये चूक या योजना में बड़ी खामी का नतीजा थी? जानिए इस अजीब सफर की पूरी कहानी।

Vande Bharat Record Journey: भारतीय रेलवे की शान कही जाने वाली वंदे भारत ट्रेन एक बार अपने ही तकनीकी गलती के कारण सुर्खियों में आ गई। जहां यह ट्रेन स्पीड, कम्फर्ट और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए जानी जाती है, वहीं इस बार इसने एक रिकॉर्ड तोड़ा-लेकिन गर्व से नहीं, गलती सेा साबरमती से गुड़गांव जाने वाली वंदे भारत स्पेशल (09401) ट्रेन को एक ऐसी गलती के कारण 28 घंटे लंबा सफर तय करना पड़ा, जो दरअसल सिर्फ 15 घंटे में पूरा होना था। वजह थी-ट्रेन का पेंटोग्राफ ओवरहेड वायर तक नहीं पहुंच पा रहा था!

आख़िर क्यों फंस गई वंदे भारत ट्रेन?

दरअसल, रेलवे ने इस ट्रेन को ऐसे ट्रैक पर भेज दिया जहाँ ओवरहेड बिजली के तार (OHE) सामान्य से ज्यादा ऊँचे थे। इन ऊंचे तारों का इस्तेमाल डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ियों के लिए किया जाता है ताकि वे आसानी से गुजर सकें। लेकिन वंदे भारत जैसी यात्री ट्रेनें इस तरह की ऊँचाई के लिए डिज़ाइन नहीं की गईं। यही गलती हुई! ट्रेन में लगा लो-रीच पेंटोग्राफ ऊँचे तारों से संपर्क नहीं कर सका, और ट्रेन बीच रास्ते में ही रुक गई।

क्या है पेंटोग्राफ और क्यों हुई दिक्कत?

पेंटोग्राफ एक ऐसा धातु ढांचा होता है जो ट्रेन की छत पर लगा होता है और ऊपर से बिजली लेता है। जब तार बहुत ऊपर होते हैं और पेंटोग्राफ छोटा होता है, तो ट्रेन को बिजली नहीं मिलती और यही हुआ इस वंदे भारत के साथ।

कैसे बनी यह गलती एक ‘रिकॉर्ड’ यात्रा?

मेहसाणा के पास ट्रेन रुकने के बाद रेलवे अधिकारियों ने तुरंत नया रास्ता खोजा। अब ट्रेन को घुमाकर अहमदाबाद–उदयपुर–कोटा–जयपुर–मथुरा के लंबे रास्ते से भेजा गया। 

परिणाम? 

  • कुल 1,400 किलोमीटर की दूरी 
  • 28 घंटे की यात्रा 
  • और वंदे भारत की अब तक की सबसे लंबी यात्रा!
  • हालांकि यह रिकॉर्ड किसी जश्न का कारण नहीं बना, बल्कि रेलवे के लिए एक तकनीकी लापरवाही की मिसाल बन गया।

क्या यह योजना की गलती थी या तकनीकी चूक?

रेलवे अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह एक बुनियादी तकनीकी गलती थी जिसे पहले ही जांच लेना चाहिए था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- “हाई-रीच पेंटोग्राफ के बिना ऊंची OHE सेक्शन पर वंदे भारत चलाना कभी संभव नहीं था।”

यात्रियों का अनुभव कैसा रहा?

जो यात्री स्पीड और कम्फर्ट की उम्मीद कर रहे थे, उनके लिए यह सफर धैर्य और इंतज़ार की परीक्षा बन गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे “रिकॉर्ड ऑफ ब्लंडर” तक कहा।

रेलवे के लिए सबक

यह घटना बताती है कि सबसे आधुनिक ट्रेन भी अगर गलत योजना और चेकिंग के बिना चलाई जाए, तो वह भी रेंग सकती है। भारतीय रेलवे के लिए यह “तकनीक से ज़्यादा जिम्मेदारी” का सबक है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना कि यह बेसिक टेक्निकल एरर थी। “हाई-रीच पेंटोग्राफ के बिना इस ट्रेन को उस रूट पर भेजना कभी संभव नहीं था,” उन्होंने कहा। इस घटना ने यह साफ किया कि योजना और तैयारी की कमी सबसे हाई-टेक ट्रेन को भी धीमा बना सकती है।

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