Char Dham Helicopter Services: DGCA के नए नियम के बाद सहस्रधारा से उड़ानें ठप

Published : Nov 02, 2026, 06:04 PM IST
Visual from the helidrome (Photo/ANI)

सार

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए सहस्रधारा से चलने वाली चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं रोक दी गई हैं। डीजीसीए ने हर उड़ान में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया है, जिसका एविएशन कंपनियां भारी विरोध कर रही हैं।

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड से चारधाम यात्रा के लिए चलने वाली चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं फिलहाल रोक दी गई हैं। सोमवार को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। हर दिन कई प्राइवेट एविएशन कंपनियां सहस्रधारा हेलीपैड से केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के लिए तीर्थयात्रियों को ले जाती हैं। उत्तराखंड के नागरिक उड्डयन सचिव विनय शंकर पांडे ने फोन पर एएनआई को बताया कि हेलीकॉप्टर कंपनियों ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को एक ज्ञापन सौंपा है। इसी वजह से अभी चार्टर सेवाएं सस्पेंड हैं। सेवाएं दोबारा कब शुरू होंगी, इसे लेकर अभी और जानकारी का इंतजार है।

दरअसल, एविएशन अथॉरिटी और प्राइवेट ऑपरेटरों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चारधाम रूट पर हेलीकॉप्टर चलाने वाली कंपनियों ने डीजीसीए को एक साथ चिट्ठी लिखकर 'दो पायलट' वाले नए नियम का विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि 2 नवंबर से सभी चार्टर उड़ानें रोक दी जाएंगी। डीजीसीए ने यह नया नियम हाल ही में हुए एक हादसे के बाद बनाया है। बद्रीनाथ से देहरादून लौटते वक्त एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था, जिसमें पायलट समेत छह लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद ही एविएशन रेगुलेटर ने हर उड़ान के लिए दो पायलट होना जरूरी कर दिया। इस नियम को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए, ऑपरेटरों ने 31 अक्टूबर को डीजीसीए को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा था।

कंपनियों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना बातचीत के इस नियम को थोपने से पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर चलाना आर्थिक रूप से नामुमकिन हो जाएगा। ऊंचाई वाले इलाकों में यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए ऑपरेटरों ने कहा कि सुरक्षा के नए नियम व्यावहारिक और टिकाऊ होने चाहिए। कंपनियों ने अपनी साझा चिट्ठी में लिखा,

हम एविएशन सेफ्टी बनाए रखने की अथॉरिटी की जिम्मेदारी को समझते हैं और उसकी तारीफ करते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि ऑपरेटरों से बात किए बिना और इसके आर्थिक असर को समझे बिना, दो पायलट का नियम लागू करने से हमारे लिए काम जारी रखना आर्थिक रूप से संभव नहीं होगा। हर चार्टर उड़ान में दो पायलट रखने से हमारा खर्च काफी बढ़ जाएगा। क्रू की जरूरत, उनके रहने का इंतजाम और बाकी खर्चे भी बढ़ेंगे। अभी जो चार्टर रेट्स और प्रॉफिट मार्जिन हैं, उसमें ऑपरेटर यह अतिरिक्त खर्च नहीं उठा सकते। और न ही यह सारा बोझ ग्राहकों पर डालना मुमकिन है। हमारा साफ मानना है कि सुरक्षा से जुड़ा कोई भी नया कदम व्यावहारिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ होना चाहिए, और इसे ऑपरेटरों से बातचीत करके ही बनाया जाना चाहिए। इसलिए, आपस में चर्चा करने के बाद, सभी ऑपरेटर मौजूदा रूप में दो पायलट वाले नियम को मानने में असमर्थता जताते हैं।

उड़ानों को रोकने की औपचारिक जानकारी देते हुए चिट्ठी में चेतावनी दी गई,

इन सब बातों को देखते हुए, हम औपचारिक रूप से बताना चाहते हैं कि सभी ऑपरेटर 2 नवंबर 2026 से अपनी चारधाम चार्टर सेवाएं रोकने का प्रस्ताव रख रहे हैं। यह रोक तब तक रहेगी जब तक मामले की समीक्षा नहीं हो जाती और ऑपरेटरों के साथ मिलकर कोई बीच का रास्ता नहीं निकाल लिया जाता।

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