
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चमोली जिले के गैरसैंण नगर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति मजबूत करने के उद्देश्य से रामगंगा नदी पर बांध बनाने की परियोजना को वित्तीय मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की कुल लागत ₹122.6891 करोड़ निर्धारित की गई है।
परियोजना के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। साथ ही, काम शुरू करने के लिए पहली किश्त के रूप में ₹2.454 करोड़ की धनराशि भी मंजूर की गई है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से गैरसैंण नगर और आसपास की आबादी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत प्रस्तावित यह परियोजना गैरसैंण नगर और उससे लगी आबादी को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ पानी की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं का विकास जरूरी हो गया है। रामगंगा नदी पर बांध निर्माण की योजना को इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने पर गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शासनादेश के अनुसार, परियोजना की कुल स्वीकृत लागत के लगभग 2 प्रतिशत के बराबर ₹2.454 करोड़ की प्रारंभिक धनराशि मंजूर की गई है। यह रकम राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम आहरित करके उपलब्ध कराई जाएगी। इस राशि को परियोजना के शुरुआती कार्यों के लिए टोकन धनराशि के रूप में स्वीकृति दी गई है। इससे परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार ने परियोजना के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था भी स्पष्ट की है, ताकि निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में धन की उपलब्धता से जुड़ी परेशानी न हो।
परियोजना के लिए स्वीकृत प्रारंभिक धनराशि का समायोजन भारत सरकार से Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment for 2026-27 (SASCI) के तहत राशि प्राप्त होने के बाद राज्य सेक्टर से किया जाएगा। परियोजना के अगले चरणों के लिए भी इसी योजना के अंतर्गत धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वीकृत रकम का इस्तेमाल वास्तविक जरूरत के अनुसार अलग-अलग किस्तों में किया जाएगा। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में उपलब्ध कराई गई धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। इस वित्तीय व्यवस्था का उद्देश्य परियोजना के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना और निर्माण कार्यों को तय योजना के अनुसार आगे बढ़ाना है।
राज्य सरकार ने परियोजना के निर्माण में गुणवत्ता, तकनीकी उपयुक्तता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बांध और बैराज से संबंधित संरचनात्मक डिजाइन एवं ड्राइंग को किसी मान्यता प्राप्त संस्था से जांच और सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसके अलावा, सिंचाई विभाग को बांध और बैराज के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे इनके संचालन की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले क्षेत्रीय मुख्य अभियंता को कार्यस्थल का निरीक्षण करना होगा। जरूरत के अनुसार मिट्टी की जांच और क्षेत्र की भूगर्भीय उपयुक्तता से संबंधित रिपोर्ट भी प्राप्त करनी होगी। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य निर्माण से पहले स्थल की परिस्थितियों का सही आकलन करना और तकनीकी मानकों के अनुरूप काम सुनिश्चित करना है।
परियोजना के निर्माण के दौरान जल स्रोत में निर्धारित डिजाइन अवधि तक जरूरी न्यूनतम पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य जल संसाधन के प्रबंधन के साथ पेयजल की जरूरतों का ध्यान रखना है। इसके अलावा, बांध निर्माण के कारण नदी के निचले हिस्से यानी डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में आने वाले गांवों की जलापूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। शासनादेश के मुताबिक, इन गांवों को निर्माण कार्य के दौरान और परियोजना पूरी होने के बाद भी निर्बाध रूप से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इस शर्त के जरिए परियोजना के निर्माण के साथ-साथ आसपास की आबादी की पेयजल जरूरतों को भी प्राथमिकता दी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचे और उनकी जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध हों।
गैरसैंण में रामगंगा नदी पर प्रस्तावित बांध परियोजना को इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। परियोजना के लिए वित्तीय मंजूरी और शुरुआती धनराशि स्वीकृत होने से इसके क्रियान्वयन की दिशा में कदम बढ़ा है। अब निर्माण से पहले जरूरी तकनीकी जांच, स्थल निरीक्षण और अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
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