
उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ सुगंधित और औषधीय फसलों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर काम शुरू किया गया है। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महक क्रांति नीति’ के तहत प्रदेश के सात जिलों में 22,750 हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंध फसलों की खेती विकसित की जाएगी, जिससे 91 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी फसलें किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं, क्योंकि इनकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और इनसे कम भूमि में भी बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। यही कारण है कि विभिन्न जिलों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग सुगंध फसलों के क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
महक क्रांति नीति के तहत प्रत्येक जिले की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए फसलों का चयन किया गया है।
पलायन रोकने की दिशा में उत्तराखण्ड सरकार का अहम कदम।#Uttarakhand pic.twitter.com/ss4gI9Klrk
— CM Office Uttarakhand (@ukcmo) August 5, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि सुगंध फसलों की खेती पारंपरिक कृषि की तुलना में अधिक लाभ देने की क्षमता रखती है। इन फसलों के तेल, अर्क और प्रसंस्कृत उत्पादों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए विकल्प भी तैयार होंगे। सरकार की योजना केवल खेती तक सीमित नहीं है। इसके साथ प्रसंस्करण इकाइयों, विपणन नेटवर्क और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार और बेहतर आजीविका की तलाश में होने वाला पलायन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। सरकार का मानना है कि यदि गांवों में ही आय के स्थायी और लाभकारी अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो लोगों को अपने क्षेत्र छोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
महक क्रांति नीति को इसी सोच के साथ तैयार किया गया है। सुगंध फसलों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगी। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को सुगंध और औषधीय फसलों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। 22,750 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित खेती और 91 हजार से अधिक किसानों की भागीदारी इस दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि योजना तय लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ती है तो यह न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण विकास और पलायन रोकने के प्रयासों को भी नई गति दे सकती है।
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