Uttarakhand News: महिलाओं का हुनर बना रोजगार, PM Vishwakarma से स्वरोजगार योजना तक से बदली तस्वीर

Published : Aug 20, 2026, 08:06 PM IST
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सार

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री स्वरोजगार, कौशल विकास और PM विश्वकर्मा योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। अल्मोड़ा की भावना शर्मा इसकी प्रेरक मिसाल हैं।

उत्तराखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। स्वरोजगार, कौशल विकास और पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिशों के बीच अब पहाड़ की महिलाएं अपने हुनर को आय का जरिया बना रही हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, राज्य में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, ग्राम उत्थान योजना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर गांवों में आजीविका के नए विकल्प तैयार करना भी है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से बढ़ रही महिलाओं की आर्थिक भागीदारी

राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और कौशल विकास कार्यक्रम के जरिए महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्वरोजगार शुरू करने के लिए जरूरी मार्गदर्शन और सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। ग्राम उत्थान योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी सहयोग दिया जा रहा है। इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और पलायन रोकने की कोशिशों को भी मजबूती मिल रही है।

अल्मोड़ा की भावना शर्मा बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा

अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया क्षेत्र के पीपलधार गांव की रहने वाली भावना शर्मा इसका एक अच्छा उदाहरण बनकर सामने आई हैं। उन्होंने पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को रोजगार से जोड़ने का रास्ता चुना है। भावना शर्मा महिलाओं के साथ मिलकर पहाड़ी दालों की आकर्षक पैकेजिंग तैयार कर रही हैं। इसके अलावा वे अचार, ऐपण पेंटिंग, ऐपण फ्रेम, ऐपण साड़ी और क्रोशिया से बने उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों के जरिए स्थानीय महिलाओं को आय का नया स्रोत मिला है और पारंपरिक कला को भी नई पहचान मिल रही है।

ऐपण कला और पारंपरिक हस्तशिल्प को मिल रहा नया बाजार

उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला लंबे समय से सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। अब इसे आधुनिक डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप नए रूप में तैयार किया जा रहा है। ऐपण फ्रेम, साड़ियों और सजावटी वस्तुओं की बढ़ती मांग से महिलाओं को अपने हुनर को व्यावसायिक रूप देने का अवसर मिल रहा है। इसी तरह पहाड़ी दालों और घरेलू उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग उन्हें व्यापक बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही है।

चमोली में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से खुल रहे नए अवसर

चमोली जिले में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत कुशल युवाओं और महिलाओं को पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से बढ़ई, लोहार, कारीगर और अन्य पारंपरिक शिल्प से जुड़े लोगों के साथ महिलाओं को भी आधुनिक उपकरणों, कौशल उन्नयन और उद्यमिता की जानकारी दी जा रही है। इससे रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते तैयार हो रहे हैं।

स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर सरकार का जोर

उत्तराखंड सरकार की कोशिश है कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार मिले। इसके लिए प्रशिक्षण, उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब पारंपरिक हुनर आधुनिक बाजार से जुड़ेगा तो महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को देशभर में नई पहचान मिलेगी।

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