Uttarakhand News: ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल, सीएम धामी ने किया किसानों के लिए बड़े मुआवजे का ऐलान

Published : Oct 14, 2026, 08:44 PM IST
Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami (File photo/ANI)

सार

उत्तराखंड में ओलावृष्टि से परेशान किसानों के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राहत का पिटारा खोला है। सरकार ने फसल नुकसान पर अतिरिक्त मुआवजा देने, तीन महीने तक बिजली बिल टालने और केसीसी लोन चुकाने में मोहलत देने का फैसला किया है।

देहरादून। उत्तराखंड में हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित किसानों को बड़ी राहत दी है। सीएम ने अधिकारियों को तुरंत एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने तय किया है कि खेती, बागवानी और गन्ने की फसल को हुए नुकसान पर किसानों को आपदा राहत नियमों के तहत मिलने वाली रकम के बराबर ही अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने किसानों के बिजली बिल टालने और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन चुकाने में भी छूट देने का फैसला किया है।

सीएम धामी के निर्देशों के मुताबिक, ओलावृष्टि की मार झेल रहे किसानों को आपदा राहत के तय मानकों के बराबर ही एक्स्ट्रा पैसा मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि फसल बर्बाद होने से किसानों पर जो आर्थिक बोझ पड़ा है, उसे कम किया जा सके ताकि वे आगे की खेती और बागवानी बिना किसी रुकावट के कर सकें।

किसानों को तुरंत राहत देने के लिए राज्य सरकार ने अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीने के बिजली बिलों का भुगतान टाल दिया है। इस फैसले से किसानों को फौरी तौर पर बड़ी राहत मिलेगी और वे नुकसान से उबरने पर फोकस कर पाएंगे।

इसके साथ ही, सरकार किसानों को लोन चुकाने में भी मोहलत देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी जाएगी, जिसमें किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन की किस्तें चुकाने के लिए तीन महीने का एक्स्ट्रा समय मांगने की गुजारिश होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सरकार किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की रोजी-रोटी बचाने और खेती-किसानी को सुचारू रखने के लिए हर मुमकिन कदम उठाए जाएंगे।

सरकार के इन फैसलों से ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को न सिर्फ आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले महीनों में खेती के काम को जारी रखने में भी आसानी होगी।

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