Uttarakhand News: SDG के 11 साल पूरे, अब 2047 के विजन पर धामी सरकार का फोकस

Published : Sep 25, 2026, 02:55 PM IST
Uttarakhand sdg 11 years

सार

SDG के 11 साल पूरे होने पर उत्तराखंड ने सतत विकास की उपलब्धियां सामने रखीं। अब 2030 के बाद भी विकास जारी रखने के लिए विजन 2047 पर फोकस है।

देहरादून। सतत विकास लक्ष्यों यानी Sustainable Development Goals (SDGs) को अपनाए जाने के 11 साल पूरे हो गए हैं। 25 सितंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने 2030 एजेंडा को स्वीकार किया था। इसके केंद्र में 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 संबंधित लक्ष्य हैं, जिनका उद्देश्य गरीबी और असमानता कम करने से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाना है।

इस मौके पर उत्तराखंड ने भी अपने विकास मॉडल को SDGs के साथ जोड़ते हुए राज्य में चल रही विभिन्न पहलों और प्रयासों को सामने रखा। राज्य सरकार के अनुसार, पिछले 25 दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में किए जा रहे उन कार्यों को साझा किया गया, जो सतत और समावेशी विकास के 17 वैश्विक लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में योगदान दे रहे हैं।

उत्तराखंड में SDGs को जमीन पर उतारने की कोशिश

सतत विकास का मतलब केवल आर्थिक तरक्की नहीं है। इसमें सामाजिक समावेशन और पर्यावरण संरक्षण को भी साथ लेकर चलना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा में भी आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संरक्षण को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए यह पहल और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों, जल, जंगल, जैव विविधता और पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को संतुलित रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में SDGs को स्थानीय स्तर की योजनाओं और नीतियों से जोड़ना दीर्घकालिक विकास की दिशा में अहम माना जा सकता है।

राज्य की ओर से पिछले 25 दिनों में सामने रखी गई पहलें इसी व्यापक तस्वीर का हिस्सा हैं। इनमें विकास को अधिक समावेशी बनाने और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचे।

SDG India Index में उत्तराखंड का प्रदर्शन

SDGs के क्षेत्र में उत्तराखंड की स्थिति को नीति आयोग के SDG India Index से भी देखा जा सकता है। SDG India Index 2023-24 में उत्तराखंड का स्कोर 79 रहा, जबकि 2020-21 में राज्य का स्कोर 72 था। 2023-24 के इंडेक्स में उत्तराखंड का स्कोर राष्ट्रीय औसत 71 से भी ऊपर दर्ज किया गया। यह इंडेक्स गरीबी, भूख, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ पानी, स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार, बुनियादी ढांचे, असमानता और पर्यावरण जैसे कई क्षेत्रों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति को मापने का प्रयास करता है।

हालांकि, किसी इंडेक्स में बेहतर स्कोर अपने आप में विकास की पूरी तस्वीर नहीं बताता। पर्वतीय राज्य के सामने भौगोलिक परिस्थितियों, आपदा जोखिम, पलायन, पर्यावरण संरक्षण और दूरदराज के क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाने जैसी अलग चुनौतियां भी हैं। इसलिए आने वाले वर्षों में विकास की गति के साथ उसकी टिकाऊ प्रकृति भी महत्वपूर्ण होगी।

2030 के बाद भी जारी रहेगी विकास की यात्रा

राज्य सरकार का कहना है कि सतत और समावेशी विकास की यह यात्रा केवल वर्ष 2030 तक सीमित नहीं रहेगी। SDGs की सीख और अब तक के अनुभवों को आधार बनाकर उत्तराखंड दीर्घकालिक विकास की तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में 'विकसित उत्तराखंड विजन 2047' के माध्यम से राज्य के लिए लंबे समय की विकास रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विकास को अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ दिशा देना है।

2030 एजेंडा की मूल भावना भी यही है कि विकास ऐसा हो जिसमें कोई पीछे न छूटे। संयुक्त राष्ट्र के 17 SDGs गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, पानी, ऊर्जा, रोजगार, जलवायु कार्रवाई, जैव विविधता, मजबूत संस्थानों और वैश्विक साझेदारी जैसे व्यापक मुद्दों को कवर करते हैं।

विकसित उत्तराखंड के लिए साझा जिम्मेदारी

उत्तराखंड सरकार ने SDG की इस यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए इसे साझा संकल्प बनाने की अपील की है। संदेश साफ है—सतत विकास केवल सरकारी योजनाओं से पूरा होने वाला लक्ष्य नहीं है। इसमें नागरिकों, स्थानीय संस्थाओं, समुदायों और विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी भी जरूरी है।

राज्य के लिए अब चुनौती यह होगी कि 2030 तक निर्धारित वैश्विक लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति को अगले चरण के दीर्घकालिक विकास से जोड़ा जाए। SDGs से विकसित उत्तराखंड विजन 2047 तक का यह बदलाव राज्य के लिए विकास को केवल तेज नहीं, बल्कि संतुलित और टिकाऊ बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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