
देहरादून। उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थयात्रा का दबाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर गर्मियों, छुट्टियों और चारधाम यात्रा के दौरान पर्वतीय शहरों में वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम और पार्किंग की समस्या सामने आती रही है। इसे देखते हुए राज्य सरकार अब सड़क और यातायात व्यवस्था के साथ पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने पिछले चार वर्षों में पर्वतीय जिलों में 63 पार्किंग परियोजनाओं के जरिए कुल 4202 वाहनों की क्षमता विकसित की है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से पर्यटकों और श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों को भी राहत मिली है।
पर्वतीय इलाकों में जमीन की उपलब्धता सीमित होने के कारण हर जगह सामान्य पार्किंग बनाना आसान नहीं होता। इसी वजह से स्थान और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग मॉडल अपनाए जा रहे हैं। आवास विभाग की ओर से प्रमुख शहरों, पर्यटन केंद्रों और तीर्थस्थलों पर सरफेस पार्किंग, बहुमंजिला पार्किंग और ऑटोमेटेड पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मकसद साफ है- सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों को कम करना और मुख्य सड़कों पर यातायात को सुचारु बनाए रखना।
राज्य स्तर पर पार्किंग परियोजनाओं को लेकर पहले से भी काम चल रहा है। उपलब्ध सरकारी जानकारी के मुताबिक राज्य में 191 स्थानों पर पार्किंग परियोजनाएं चिह्नित की गई थीं, जिनमें कई परियोजनाएं निर्माण या संचालन के चरण में हैं। स्मार्ट और मल्टीलेवल पार्किंग को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
नैनीताल में पार्किंग की समस्या लंबे समय से पर्यटन व्यवस्था की बड़ी चुनौतियों में रही है। शहर में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ सीमित सड़क और पार्किंग स्थान पर दबाव भी बढ़ता है। इसी को देखते हुए मेट्रोपोल होटल परिसर क्षेत्र में पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। तैयार होने के बाद यहां करीब 700 वाहन खड़े किए जा सकेंगे। हाल की जानकारी के मुताबिक इस परियोजना की लागत करीब 42 करोड़ रुपये बताई गई है और काम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मेट्रोपोल परिसर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी उत्तराखंड सरकार को अस्थायी पार्किंग उपयोग की अनुमति दी गई थी। मुख्यमंत्री धामी ने नैनीताल की पार्किंग समस्या को देखते हुए इस स्थान के उपयोग का अनुरोध किया था। नैनीताल प्रशासन भी पार्किंग व्यवस्था को लेकर लगातार दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। पर्यटन सीजन में शहर के संवेदनशील हिस्सों में वाहनों का दबाव कम रखने के लिए मौजूदा पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करने की व्यवस्था है।
नैनीताल के बाद अब कैंची धाम में भी बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए पार्किंग क्षमता बढ़ाई जा रही है। यहां बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें एक बार में 500 से अधिक वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इस परियोजना का सीधा असर कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं और आसपास के यातायात पर पड़ने की उम्मीद है। खास मौकों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में वाहनों को व्यवस्थित तरीके से पार्क करने की सुविधा मिलने से मुख्य मार्गों पर यातायात दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित बहुमंजिला पार्किंग में 300 से ज्यादा चारपहिया और 200 से ज्यादा दोपहिया वाहनों की क्षमता रखने की योजना है।
उत्तराखंड में पर्यटन के साथ धार्मिक यात्राओं का दबाव भी लगातार बढ़ता है। चारधाम यात्रा मार्गों पर सीमित जगह में बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने से कई बार यातायात प्रबंधन चुनौती बन जाता है। ऐसे में केवल सड़कों का विस्तार पर्याप्त नहीं है। पार्किंग की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार का जोर अब ऐसे स्थानों पर पार्किंग क्षमता तैयार करने पर है जहां पर्यटक या श्रद्धालु अपने वाहन सुरक्षित खड़े करके आगे की यात्रा कर सकें। इसका एक फायदा यह भी है कि स्थानीय बाजारों और शहरों की मुख्य सड़कों पर वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग कम हो सकती है। इससे स्थानीय नागरिकों के आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पार्किंग का मॉडल मैदानी शहरों से अलग रखना पड़ता है। जहां जगह उपलब्ध है, वहां सरफेस पार्किंग बनाई जा सकती है। वहीं कम जगह वाले व्यस्त पर्यटन केंद्रों में मल्टीलेवल या ऑटोमेटेड पार्किंग ज्यादा उपयोगी हो सकती है। राज्य की आवास एवं नगरीय विकास व्यवस्था में टनल, कैविटी, मल्टीस्टोरी, सरफेस और ऑटोमेटेड/मैकेनिकल कार पार्किंग जैसे विकल्पों को लेकर भी सरकारी स्तर पर काम और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि सरकार केवल मौजूदा पार्किंग स्थलों की संख्या बढ़ाने के बजाय पहाड़ी शहरों की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग समाधान अपनाने की कोशिश कर रही है।
नैनीताल में पार्किंग की समस्या को समझने के लिए उपलब्ध आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक शहर में पर्यटन विभाग के पास करीब 320 होटल और होमस्टे पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें से केवल 92 में पार्किंग की सुविधा बताई गई थी। इन स्थानों पर करीब 1,330 वाहन खड़े हो सकते हैं। नैनीताल, भवाली और कैंची धाम की धारण क्षमता को लेकर सर्वे की तैयारी भी की गई थी। यानी समस्या केवल सड़क पर बढ़ते ट्रैफिक की नहीं है। पर्यटक वाहनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। यही वजह है कि मेट्रोपोल और अन्य पार्किंग परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में प्रदेश में पार्किंग सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय जनपदों में 63 पार्किंग परियोजनाओं का काम पूरा होने के बाद पार्किंग की समस्या काफी हद तक कम हुई है। इससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय नागरिकों को भी राहत मिली है।
सरकार के सामने अब अगली चुनौती इन परियोजनाओं को केवल निर्माण तक सीमित न रखते हुए उनके बेहतर संचालन और पर्यटन सीजन के दौरान प्रभावी ट्रैफिक मैनेजमेंट से जोड़ने की है। क्योंकि उत्तराखंड में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में पार्किंग व्यवस्था आने वाले वर्षों में पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा रहने वाली है।
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