
MANAV Vision in AI Summit 2026: 'भारत अब सिर्फ AI यूजर नहीं, बल्कि AI लीडर बनने की तैयारी में है।' गुरुवार को एआई इंपैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भारत की नई सोच 'MANAV Vision' के बारें में बताया। उन्होंने साफ कहा कि AI का फ्यूचर इंसान के लिए होना चाहिए, इंसान के खिलाफ नहीं। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की बात नहीं है, बल्कि यह तय करने की बात है कि आने वाले सालों में AI हमारी जिंदगी को कैसे बदलेगा।
एआई इंपैक्ट समिट के मंच से प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की 'MANAV Vision' 21वीं सदी की AI दुनिया में मानव कल्याण की मजबूत कड़ी बनेगी। उन्होंने कहा कि AI को ऐसा बनाया जाना चाहिए, जो इंसानों को सिर्फ डेटा तक सीमित न कर दे। टेक्नोलॉजी इंसान की मदद के लिए होनी चाहिए, न कि इंसान टेक्नोलॉजी का साधन बन जाए।
M (Moral & Ethical): AI नैतिक मूल्यों पर आधारित हो। फैसले लेने में सही और गलत का ध्यान रखा जाए।
A (Accountable Governance): AI के लिए साफ नियम हों, निगरानी मजबूत हो और सिस्टम पारदर्शी हो।
N (National Sovereignty): जिसका डेटा, उसका अधिकार। यानी देश और नागरिकों का डेटा सुरक्षित रहे।
A (Accessible & Inclusive): AI सबके लिए हो। यह कुछ कंपनियों का हथियार न बने, बल्कि आम लोगों की मदद करे।
V (Valid & Legitimate): AI का उपयोग कानूनी और भरोसेमंद हो, जो भी सिस्टम बने, वह जांचा-परखा जा सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि AI को लोकतांत्रिक बनाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर AI सिर्फ बड़ी कंपनियों या कुछ देशों के हाथ में रहा, तो असमानता बढ़ सकती है। खासकर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के लिए AI एक अवसर बन सकता है, अगर इसे सही दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
प्रधानमंत्री ने AI को GPS से जोड़ा। उन्होंने कहा, 'जैसे GPS रास्ता दिखाता है, लेकिन आखिरी फैसला हमारा होता है कि किस दिशा में जाना है, उसी तरह AI हमें मदद दे सकता है, लेकिन कंट्रोल इंसानों के हाथ में रहना चाहिए।' आज जो दिशा हम AI को देंगे, वही आने वाले समय का भविष्य तय करेगी।
AI और नौकरियों को लेकर लोगों में चिंता रहती है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह इंसानों और मशीनों के साथ काम करने का दौर है। उन्होंने इंटरनेट का उदाहरण दिया। जब इंटरनेट आया था, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि वह कितनी नई नौकरियां पैदा करेगा। AI के साथ भी ऐसा ही होगा। भविष्य की नौकरियां अभी तय नहीं हैं। यह इस पर निर्भर करेगा कि हम AI को कैसे अपनाते हैं और किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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