चौंकाने वाली स्टडी! 10 में से 9 कंपनियां मौका मिलते ही इंसानों को AI से बदलने को तैयार

Published : Mar 19, 2026, 11:05 AM IST
चौंकाने वाली स्टडी! 10 में से 9 कंपनियां मौका मिलते ही इंसानों को AI से बदलने को तैयार

सार

कंपनियां AI में निवेश के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाने को तैयार हैं। एक सर्वे के मुताबिक, 10 में से 9 बिजनेस लीडर्स AI द्वारा काम संभालने पर स्टाफ कम करेंगे। यह स्पीड और एफिशिएंसी बढ़ाने की एक दीर्घकालिक रणनीति है, जो कार्यस्थल में बड़े बदलाव का संकेत है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़्यादा पावरफुल और आम होने के साथ, कंपनियां अपने कर्मचारियों के बारे में अपनी सोच चुपचाप बदल रही हैं। एक नई स्टडी से पता चलता है कि कई बिजनेस अब बड़े वर्कफोर्स को बनाए रखने के बजाय स्पीड, एफिशिएंसी और लागत घटाने पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह दिखाता है कि कंपनियां भविष्य के लिए अपनी प्लानिंग में एक बड़ा बदलाव कर रही हैं।

ResumeBuilder ने मार्च 2026 में एक सर्वे किया। इस सर्वे में अमेरिका के 500 सीनियर बिजनेस लीडर्स से बात की गई। ज़्यादातर लीडर्स का मानना है कि जैसे-जैसे AI बेहतर होता जाएगा, नौकरियां कम होंगी। रिसर्च यह भी बताती है कि कंपनियां कर्मचारियों की संतुष्टि से ज़्यादा टेक्नोलॉजी में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं।

AI को प्राथमिकता

नतीजे बताते हैं कि 10 में से करीब 9 कंपनियां स्टाफ कम करने पर विचार करेंगी, अगर AI कुछ खास काम संभाल सकता है। इतनी ही कंपनियों ने यह भी माना कि वे AI सिस्टम पर ज़्यादा पैसा खर्च करने के लिए कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की ऊंची दर (higher employee turnover) को भी स्वीकार करने को तैयार हैं। इससे पता चलता है कि कंपनियां सिर्फ AI के साथ एक्सपेरिमेंट नहीं कर रही हैं, बल्कि इसके इर्द-गिर्द अपने काम को फिर से ऑर्गनाइज़ कर रही हैं।

एक्सपर्ट की राय

ResumeBuilder की चीफ करियर एडवाइज़र और इस स्टडी से जुड़ीं स्टेसी हॉलर (Stacie Haller) ने बताया कि कंपनियां अब इन बदलावों को सिर्फ लागत बचाने का अस्थायी तरीका नहीं मानतीं। बल्कि, वे AI में निवेश को लंबे समय के ग्रोथ के लिए ज़रूरी मान रही हैं, भले ही इससे कर्मचारियों में असंतोष क्यों न बढ़े। उनकी बातें वर्कप्लेस की प्राथमिकताओं में एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करती हैं।

इंडस्ट्री का ट्रेंड

हालांकि स्टडी में किसी खास कंपनी का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन टेक्नोलॉजी सेक्टर में हाल के ट्रेंड्स इसी पैटर्न को दिखाते हैं। कई बड़ी कंपनियों ने पिछले साल अपने वर्कफोर्स में कटौती की है, जबकि AI-आधारित पहलों पर अपना फोकस बढ़ाया है। यह दिखाता है कि स्टडी के नतीजे सिर्फ थ्योरी नहीं हैं, बल्कि असल दुनिया की बिजनेस स्ट्रैटजी पर असर डाल रहे हैं।

अमेज़ॅन का उदाहरण

इसका एक साफ़ उदाहरण अमेज़ॅन (Amazon) है। कंपनी ने हाल ही में अपने ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने के लिए लगभग 16,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। वहीं दूसरी तरफ, कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी निवेश कर रही है, खासकर अपनी क्लाउड डिवीज़न, अमेज़ॅन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) के ज़रिए। CEO एंडी जेसी (Andy Jassy) ने कहा है कि AI भविष्य में कंपनी के रेवेन्यू को काफी बढ़ा सकता है, जो शायद पहले के अनुमानों को दोगुना कर दे।

भविष्य कैसा होगा?

कर्मचारियों के लिए यह बदलाव अनिश्चितता लेकर आया है। जो भूमिकाएं कभी सुरक्षित मानी जाती थीं, अब उन पर फिर से विचार किया जा रहा है। हायरिंग के सुस्त बाज़ार में नई नौकरी के मौके ढूंढना मुश्किल हो सकता है। कई कर्मचारी चिंतित महसूस कर सकते हैं क्योंकि कंपनियां इंसानी नौकरियों को ऑटोमेटेड सिस्टम से बदलने के लिए ज़्यादा ओपन हो रही हैं।

स्टडी यह भी बताती है कि यह स्थिति हमेशा नहीं रह सकती। भविष्य में जब जॉब मार्केट सुधरेगा, तो कर्मचारी इस बात पर ज़्यादा ध्यान दे सकते हैं कि इस दौर में कंपनियों ने अपने स्टाफ के साथ कैसा व्यवहार किया। इसका मतलब है कि AI के इस दौर में लिए गए फैसलों का खामियाजा कंपनियों को बाद में भुगतना पड़ सकता है, भले ही अभी इसके शॉर्ट-टर्म असर मैनेजेबल लग रहे हों।

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