
नई दिल्लीः आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल बहुत जल्द भारत में अपनी पेमेंट सर्विस 'एप्पल पे' (Apple Pay) लॉन्च कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए एप्पल और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के बीच बातचीत चल रही है। अगर यह बातचीत सफल होती है, तो गूगल पे और फोनपे की तरह एप्पल पे भी UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब एप्पल भारत में अपनी पेमेंट सर्विस लाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी कई सालों से इसके लिए प्रयास कर रही है, लेकिन पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डेटा लोकलाइजेशन नियमों को लेकर बात अटक गई थी। अब लगता है कि कंपनी ने UPI के जरिए बाजार में उतरने का नया रास्ता खोज लिया है।
एप्पल पे एक डिजिटल वॉलेट और मोबाइल पेमेंट सर्विस है, जो सिर्फ एप्पल के डिवाइस पर काम करती है। यानी इसका इस्तेमाल आईफोन, एप्पल वॉच, आईपैड और मैक यूजर्स ही कर सकते हैं। इसके जरिए यूजर्स दुकानों पर, ऐप्स के अंदर और सफारी ब्राउजर पर वेबसाइटों पर पेमेंट कर सकते हैं।
सिक्योरिटी के लिए यह फेस आईडी, टच आईडी या पासकोड का इस्तेमाल करता है। दुकानों पर पेमेंट के लिए यह नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक का उपयोग करता है, जिसे 'टैप एंड पे' भी कहते हैं। खास बात यह है कि एप्पल यूजर्स, दुकानदारों या डेवलपर्स से कोई फीस नहीं लेता, बल्कि बैंकों के साथ पार्टनरशिप करके कमाई करता है।
भारत का डिजिटल पेमेंट बाजार पूरी तरह से UPI के कब्जे में है, जिसे NPCI ने बनाया है। यह एक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है जो आज करोड़ों भारतीयों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में एप्पल पे के लिए राह आसान नहीं होगी।
दोनों के बीच सबसे बड़ा फर्क टेक्नोलॉजी का है। UPI मुख्य रूप से QR कोड पर काम करता है, जो आपको हर छोटी-बड़ी दुकान पर मिल जाएगा। वहीं, एप्पल पे NFC पर निर्भर है, जिसके लिए NFC-इनेबल्ड POS मशीनें चाहिए, और ये भारत में अभी भी सीमित हैं।
दूसरा बड़ा अंतर इकोसिस्टम का है। UPI किसी भी स्मार्टफोन पर (एंड्रॉयड हो या iOS) चल सकता है, जबकि एप्पल पे सिर्फ एप्पल के महंगे डिवाइस तक ही सीमित रहेगा। भारत में आईफोन यूजर्स की संख्या एंड्रॉयड के मुकाबले बहुत कम है, जो एप्पल पे की पहुंच को सीमित कर देगा। अब देखना यह होगा कि क्या एप्पल का ब्रांड नाम उसे इस मुश्किल बाजार में पैर जमाने में मदद कर पाता है या नहीं।
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