Drone Technology: ideaForge के इस ड्रोन को मिली DGCA की हरी झंडी, जानें क्या करेगा काम

Published : May 22, 2026, 08:04 PM IST
Drone Technology

सार

ideaForge के Q6 V2 GEO ड्रोन को DGCA से टाइप सर्टिफिकेशन मिला है। अब यह सर्वे, मैपिंग और निगरानी के लिए व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होगा। यह 45 मिनट से ज़्यादा उड़ सकता है और LiDAR जैसे एडवांस्ड पेलोड को सपोर्ट करता है।

नई दिल्ली: ड्रोन बनाने वाली कंपनी ideaForge Technology को अपने Q6 V2 GEO ड्रोन के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से टाइप सर्टिफिकेशन मिल गया है। इस मंजूरी के बाद अब इस ड्रोन को पूरे भारत में सर्वे, मैपिंग और हवाई निगरानी जैसे कामों के लिए व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। ड्रोन नियम, 2021 के तहत जारी यह सर्टिफिकेशन इस ड्रोन को 'स्मॉल' कैटेगरी में रखता है। इस कैटेगरी में 2 किलो से 25 किलो के बीच वजन वाले मानवरहित विमान आते हैं।

Q6 V2 GEO की खासियतें

Q6 V2 GEO ड्रोन को पांच तरह के पेलोड (उपकरण) के साथ इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। इनमें सिर्फ LiDAR, LiDAR के साथ RGB इमेजिंग, हाई-रिजॉल्यूशन फोटोग्रामेट्री, थ्री-डायमेंशनल ऑब्लिक इमेजिंग और दिन-रात दोनों समय काम करने वाले डुअल-सेंसर शामिल हैं। यह ड्रोन एक बार में 45 मिनट से ज़्यादा उड़ सकता है। यह खासियत बड़े इलाकों के सर्वे में बहुत काम आती है, क्योंकि इससे बार-बार बैटरी बदलने के लिए ड्रोन को नीचे उतारने का समय और खर्च बचता है।

इस प्लेटफॉर्म को खास तौर पर ज़मीन का मॉडल बनाने, कॉरिडोर मैपिंग, खनन के लिए वॉल्यूम का विश्लेषण, इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच, पर्यावरण की निगरानी और ऐतिहासिक धरोहरों के दस्तावेजीकरण जैसे कामों के लिए तैयार किया गया है। कंपनी ने यह भी बताया है कि यह ड्रोन ग्लेशियर और हिमस्खलन की मैपिंग, नदी घाटियों के सर्वे और ग्रामीण ज़मीनों के डिजिटलीकरण जैसे कामों में भी इस्तेमाल हो सकता है। इन क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियां बड़े पैमाने पर हवाई समाधान खोज रही हैं, खासकर सर्वे ऑफ इंडिया के नेशनल मैपिंग मिशन और राज्यों के लैंड रिकॉर्ड डिजिटलीकरण जैसे कार्यक्रमों के तहत।

कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ अंकित मेहता ने कहा कि इस ड्रोन को "मुश्किल हालात" में काम करने के लिए बनाया गया है। इसका मकसद एंटरप्राइज ग्राहकों के साथ-साथ सुरक्षा और गवर्नेंस से जुड़ी सरकारी एजेंसियों की मदद करना है।

उन्होंने कहा, "LiDAR जैसे एडवांस्ड पेलोड के सपोर्ट के साथ, Q6 V2 GEO को सर्वे, मैपिंग और जांच से जुड़े कई तरह के कामों के लिए हाई-क्वालिटी डेटा कैप्चर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।"

Q6 V2 GEO को पहली बार भारतीय जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस 'PRAGYA 2025' में सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था। भारत में किसी भी ड्रोन को व्यावसायिक रूप से बेचने के लिए DGCA का टाइप सर्टिफिकेशन अनिवार्य है। मौजूदा नियमों के मुताबिक, इसके बिना ऑपरेटर्स कानूनी तौर पर इस ड्रोन को किराए पर या किसी और व्यावसायिक काम के लिए नहीं उड़ा सकते।

PREV

नई तकनीक, AI अपडेट्स, साइबर सुरक्षा, स्मार्टफोन लॉन्च और डिजिटल नवाचारों की आसान और स्पष्ट रिपोर्टिंग पाएं। ट्रेंडिंग इंटरनेट टूल्स, ऐप फीचर्स और गैजेट रिव्यू समझने के लिए Technology News in Hindi सेक्शन पढ़ें। टेक दुनिया की हर बड़ी खबर तेज़ और सही — केवल Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Xiaomi 17 Max: 8000mAh की तगड़ी बैटरी और 200MP कैमरे के साथ लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
Modi-Meloni Trend: ₹1 वाली Melody पर सीधे 50% डिस्काउंट! Parle टॉफियों पर बंपर छूट