
Reels Creators Alert: अगर आप भी इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर रील्स बनाते हैं, आपका सपना एक्टिंग या मॉडलिंग की दुनिया में नाम कमाना है और आप हर वक्त किसी बड़े 'ब्रांड कोलैब' या 'म्यूजिक वीडियो' के ऑफर के इंतजार में रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया पर आजकल व्यूज और फेम पाने की रेस लगी है। इसी का फायदा उठाकर इंटरनेट पर स्कैमर्स का एक ऐसा गैंग एक्टिव हुआ है, जो आपको रातों-रात स्टार बनाने का झांसा देकर आपका सब कुछ छीन सकता है। जानिए इनसे कैसे बचें और क्या करें, क्या नहीं...
इंटरनेट पर यह मामला तब गरमाया जब मोहम्मद नूफ नाम की एक उभरती हुई सोशल मीडिया क्रिएटर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें म्यूजिक कंपनी 'T-Series' के नाम से एक ईमेल मिला। मेल में दावा किया गया कि कंपनी उन्हें अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए शॉर्टलिस्ट कर चुकी है। उन्हें 7 गानों के लिए 50,000 रुपए का ऑफर दिया गया। क्रिएटर को भरोसा दिलाने के लिए बाकायदा एक एग्रीमेंट लेटर भेजा गया, जिस पर कंपनी के मालिक भूषण कुमार के जाली साइन (सिग्नेचर) भी थे। बात करने का तरीका इतना फॉर्मल और प्रोफेशनल था कि कोई भी धोखा खा जाए।
असली खेल तब शुरू हुआ जब 'कास्टिंग प्रोड्यूसर' ने ऑडिशन के नाम पर रात के वक्त वॉट्सएप (WhatsApp) पर वीडियो कॉल किया। शुरुआत में नॉर्मल एक्टिंग और डायलॉग्स बोलने को कहा गया, लेकिन धीरे-धीरे बातें बेहद आपत्तिजनक और गंदी होने लगीं। क्रिएटर को तुरंत अहसास हो गया कि यह कोई ऑफिशियल काम नहीं बल्कि एक घटिया जाल है। उन्होंने तुरंत कॉल काटा और अपनी प्राइवेसी बचाई, लेकिन हर कोई इतना किस्मत वाला नहीं होता है। क्योंकि ये ठग किसी को भी अपना शिकार बनाने के लिए एक सेट पैटर्न पर काम करते हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद खुद T-Series को सामने आना पड़ा। कंपनी ने साफ-साफ शब्दों में एक पब्लिक नोटिस जारी कर कहा है कि 'कुछ जालसाज हमारे नाम का गलत इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहे हैं। हमारी कंपनी कभी भी किसी प्रोजेक्ट, ऑडिशन या कास्टिंग के लिए Gmail या किसी दूसरे अनऑफिशियल ईमेल आईडी का इस्तेमाल नहीं करती। हमारी सभी बातचीत सिर्फ हमारे ऑफिशियल डोमेन (Official Corporate Email) से होती है।'
स्कैमर्स का फेवरेट टारगेट कौन है?
यह गैंग सबसे ज्यादा उन नए या छोटे क्रिएटर्स को ढूंढता है जो तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। नए लोगों के पास इंडस्ट्री का ज्यादा एक्सपीरिएंस नहीं होता, इसलिए वे बड़ी कंपनियों का नाम सुनते ही बिना जांच-पड़ताल किए हां कह देते हैं। हालांकि, बड़े क्रिएटर्स को भी फंसाने के लिए ये ज्यादा एडवांस और प्रोफेशनल तरीके अपनाते हैं।
भरोसा जीतने के लिए अपनाई जाने वाली ट्रिक्स
रजिस्ट्रेशन या रिफंडेबल फीस
वीडियो कॉल के अलावा रजिस्ट्रेशन या रिफंडेबल फीस के नाम पर भी ठगी की जाती है। स्कैमर्स कहते हैं, 'शूट लोकेशन बुक करने या पोर्टफोलियो प्रोसेसिंग के लिए ₹5,000 एडवांस दीजिए, जो बाद में वापस मिल जाएंगे।' पैसे मिलते ही ये गायब हो जाते हैं।
डेटा और अकाउंट हैकिंग
आपको एक लिंक भेजा जाता है और कहा जाता है, 'इस ऐप को डाउनलोड करके अपनी प्रोफाइल रजिस्टर करो।' जैसे ही आप लिंक खोलते हैं, आपके फोन का एक्सेस उनके पास चला जाता है और आपका सोशल मीडिया अकाउंट या बैंक अकाउंट हैक हो जाता है।
ब्लैकमेलिंग का नया हथियार
आपके वीडियो या वॉइस (आवाज) को रिकॉर्ड करके, AI वॉइस क्लोनिंग या डीपफेक (Deepfake) की मदद से अश्लील वीडियो बना दिए जाते हैं। इसके बाद आपकी फैमिली या फॉलोअर्स को भेजने की धमकी देकर मोटी रकम वसूली जाती है।
अगर आप अनजाने में ऐसे किसी जाल में फंस गए हैं और आपके पास कोई आपत्तिजनक कॉल या मैसेज आया है, तो डरें नहीं। तुरंत उस अकाउंट को ब्लॉक और रिपोर्ट करें। बातचीत के सारे स्क्रीनशॉट और एग्रीमेंट पेपर्स को सबूत के तौर पर संभाल कर रखें। बिना समय गंवाए भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। आपकी पहचान पूरी तरह सीक्रेट रखी जाती है।
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