
नई दिल्ली: आर्थिक शोध संस्थान एनसीएईआर ने बृहस्पतिवार को कहा कि डिजिटल रूप से भूमि रिकार्ड तैयार करने और उनकी गुणवत्ता के मामले में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है। उसके बाद क्रमश: ओड़िशा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु का स्थान है।
नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड एकोनामिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने भूमि रिकार्ड और सेवा सूचकांक (एन-एलआरएसआई 2020) जारी करते हुए कहा कि आंकड़ों से देश में भूमि से जुड़ी प्रशासन व्यवस्था बेहतर होगी। सूचकांक में 60 से 75 अंक हासिल कर मध्य प्रदेश, ओड़िशा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु पांच बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश 50 से 60 अंक की श्रेणी में
पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश 50 से 60 अंक की श्रेणी में हैं। जो राज्य पिछड़े हैं, उसमें लद्दाख, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, चंडीगढ़, केरल, असम, मणिपुर, दिल्ली और बिहार शामिल हैं।
एनसीएईआर ने एक बयान में कहा, ‘‘विभिन्न राज्यों ने पिछले कुछ साल में भूमि रिकार्ड डिजिटल रूप से तैयार करने के मामले में उल्लेखनीय काम किया है। ये रिकार्ड नागरिकों के लिये उपलब्ध होंगे।’’ एन-एलएआरएसआई का मकसद इस मामले में हुई प्रगति का आकलन करना तथा प्रत्येक राज्य में भूमि रिकार्ड में सुधार के उपायों की पहचान करना था।
आर्थिक शोध संस्थान ने कहा कि आर्थिक वृद्धि और गरीबी उन्मूलन के लिये जमीन की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सरकार, उद्योग और नागरिकों के लिये जरूरी है कि वे संपत्ति का प्रभावी तरीके से उपयोग करें और विवाद कम हों। इसके लिये भेरोसमंद भूमि और संपत्ति रिकार्ड तक पहुंच महत्वपूर्ण है।
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