
GPT-6 Astra: अगर आप ऑफिस के रोजमर्रा के काम जैसे रिपोर्ट बनाना, प्रेजेंटेशन तैयार करना या डेटा शीट भरना चुटकियों में निपटाना चाहते हैं, तो ये खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में OpenAI ने एक नया धमाका करते हुए अपना फ्लैगशिप मॉडल GPT-6 Astra पेश कर दिया है। यह नया मॉडल पुराने GPT-5.6 Sol की जगह लेगा। कंपनी का कहना है कि यह अब तक का सबसे समझदार और इंसानी दिमाग के सबसे करीब काम करने वाला AI है। आइए जानते हैं कि ये नया टूल आपको कब मिलेगा, कितना खर्च आएगा और यह ऑफिस वर्क को कैसे बदल देगा...
अगर आप इसे API के जरिए अपने ऐप्स या बिजनेस टूल्स से जोड़ना चाहते हैं, तो स्टैंडर्ड मोड के लिए $10 प्रति 10 लाख इनपुट टोकन और $50 प्रति 10 लाख आउटपुट टोकन चाहिए। अगर आपको दोगुनी स्पीड से रिजल्ट चाहिए, तो इसका चार्ज भी बिल्कुल दोगुना होगा।
ऑफिस डॉक्युमेंट्स खुद बनाएगा: वर्ड फाइल्स, बिजनेस प्रेजेंटेशन (PPT) और भारी-भरकम स्प्रेडशीट्स (Excel) यह रेडीमेड बिजनेस फॉर्मेट्स के साथ अपने आप तैयार कर देता है।
बिना रुकावट लगातार काम: पुराने मॉडल हर छोटे डाउट पर रुक जाते थे, लेकिन Astra अपनी नोट्स खुद सेव रखता है और आपसे सवाल पूछकर बैकग्राउंड में काम जारी रखता है।
कंप्यूटर चलाने में सुपरफास्ट: कंप्यूटर ऑपरेट करने वाले टास्क में यह पिछले वर्जन के मुकाबले 47% ज्यादा तेज है। जो काम पहले 75 मिनट में होता था, अब वह करीब 40 मिनट में पूरा हो जाता है।
मनगढ़ंत बातें बहुत कम: जब AI बिना सिर-पैर के गलत जवाब देता है, उसे हेलुसिनेशन कहते हैं। नए मॉडल में यह गलती घटकर सिर्फ 4.2% रह गई है, यानी गलत जवाब मिलने का रिस्क पहले से काफी कम है।
इस मॉडल के पास साइबर सिक्योरिटी और कोडिंग की गजब की ताकत है, जिसने खुद OpenAI की सेफ्टी टीम को चौंका दिया था। टेस्टिंग के दौरान इसने साइबर सुरक्षा से जुड़ी दो ऐसी खामियां (Zero-Day Vulnerabilities) खोज निकालीं, जिनकी जानकारी पहले किसी को नहीं थी। कंपनी को डर था कि इस ताकत का कोई गलत इस्तेमाल न कर ले, इसलिए इसकी लॉन्चिंग कुछ समय के लिए रोक दी गई थी। अब इसे सख्त सेफ्टी लॉक्स के साथ उतारा गया है, ताकि यह कोई खतरनाक या हैकिंग वाला कोड न लिख सके।
रीजनिंग और लॉजिक के एक बड़े टेस्ट (ARC-AGI-3) में जहां पुराना मॉडल सिर्फ 7.8% स्कोर कर पाया था, वहीं GPT-6 Astra ने 99.9% का स्कोर करके सबको चौंका दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह इंसानी स्तर की समझ के बेहद करीब पहुंच चुका है। हालांकि, ये सभी दावे अभी OpenAI की अपनी इंटरनल टेस्टिंग पर आधारित हैं। जब आम यूजर्स और स्वतंत्र रिसर्चर्स इसका इस्तेमाल करेंगे, तभी इसके असली दावों की पुष्टि हो पाएगी।
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