Mobile Manufacturing in India: 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब सरकार का फोकस सिर्फ फोन असेंबल करने पर नहीं, बल्कि बैटरी और कैमरे जैसे अहम पार्ट्स को देश में ही बनाने पर है। इसका मकसद ग्लोबल कंपनियों को भारत लाकर एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है।
Mobile Phone Production: देश के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। 'मेक इन इंडिया' पहल के 12 साल पूरे होने के मौके पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के अगले चरण की जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि भारत अब सिर्फ स्मार्टफोन असेंबल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि फोन के अंदर इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग पार्ट्स और कच्चे माल का उत्पादन भी देश में ही शुरू हो गया है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में 28 गुना का उछाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में 'मेक इन इंडिया' की शुरुआत की थी। इसका मुख्य मकसद घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, देश में ज्यादा निवेश लाना और ग्लोबल कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहित करना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 में देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 18,000 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यानी इसमें 28 गुना की बढ़ोतरी हुई है। केंद्र ने यह भी बताया कि भारत अब हर साल 33 करोड़ (330 मिलियन) से ज्यादा मोबाइल फोन बनाने की स्थिति में पहुंच रहा है।
अब फोन के अंदर के पार्ट्स बनाने पर जोर
एक स्मार्टफोन में सैकड़ों छोटे-बड़े पार्ट्स लगते हैं। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इनमें से ज्यादातर पार्ट्स और कच्चा माल अब भारत में ही बन रहा है। इसके साथ ही भारत का लक्ष्य अब सिर्फ मोबाइल फोन असेंबल करने वाले हब से आगे बढ़कर, स्मार्टफोन पार्ट्स की पूरी सप्लाई चेन विकसित करने वाले देश के रूप में अपनी पहचान बनाना है।
बैटरी बनाने में भी मिली बड़ी कामयाबी
मोबाइल फोन के लिए जरूरी बैटरी सेल का निर्माण भी भारत में शुरू हो गया है। मंत्री ने साफ किया कि देश अब सिर्फ बैटरी सेल बनाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का भी उत्पादन करेगा। सरकार की तैयारी लिथियम-आयन बैटरी सेल में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग लेयर्स और मैटेरियल को देश में ही बनाने की है।
सिंथेटिक ग्रेफाइट और इलेक्ट्रोलाइट भी बनेंगे भारत में
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि लिथियम-आयन बैटरी के एनोड में इस्तेमाल होने वाले अहम मैटेरियल 'सिंथेटिक ग्रेफाइट' को देश में बनाने की क्षमता विकसित की जा रही है। बैटरी सेल में इस्तेमाल होने वाला लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट भी अब भारत की मैन्युफैक्चरिंग चेन का हिस्सा बन रहा है। इसके अलावा, बैटरी में बिजली के सुचालक (कंडक्टर) के रूप में इस्तेमाल होने वाला एसिटिलीन ब्लैक भी देश में ही बनाया जाएगा।
कैमरे से लेकर सर्किट बोर्ड तक का निर्माण
केंद्र सरकार ने बताया कि स्मार्टफोन के अहम हिस्से जैसे कैमरा, कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, स्पीकर, कॉइल, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और कनेक्टर भी अब भारत में बन रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन अब स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के अलग-अलग चरणों में फैल रहा है।
ग्लोबल टेक कंपनियां भी कर रहीं भारत का रुख
'मेक इन इंडिया' के तहत पिछले कुछ सालों में कई ग्लोबल टेक कंपनियों ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शुरू की हैं या भारतीय कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर किए हैं। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में मिली इस शानदार ग्रोथ के बाद, अब केंद्र का लक्ष्य पार्ट्स बनाने और बैटरी सप्लाई चेन में घरेलू क्षमता को और मजबूत करना है। इस कदम से सरकार मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारत की वैल्यू एडिशन को और बढ़ाना चाहती है।
