AI Training के लिए रिकॉर्ड हो रहे घरों के वीडियो? Pronto पर लगे गंभीर आरोप, सोशल मीडिया पर बवाल

Published : May 25, 2026, 11:02 AM IST
AI Training के लिए रिकॉर्ड हो रहे घरों के वीडियो? Pronto पर लगे गंभीर आरोप, सोशल मीडिया पर बवाल

सार

बेंगलुरु के स्टार्टअप Pronto पर ग्राहकों के घरों में बॉडी कैमरे से रिकॉर्डिंग का आरोप है। कंपनी का कहना है कि यह AI ट्रेनिंग के लिए एक स्वैच्छिक पायलट प्रोग्राम है। इस विवाद के बीच, Urban Company ने प्राइवेसी का हवाला देते हुए खुद को इससे अलग किया है।

सोशल मीडिया पर प्राइवेसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और होम-सर्विस प्लेटफॉर्म के भविष्य को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। ये पूरा मामला बेंगलुरु के स्टार्टअप Pronto से जुड़ा है, जिस पर आरोप हैं कि उसके कुछ सर्विस प्रोफेशनल्स ग्राहकों के घरों में बॉडी कैमरे लगाकर वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।

इस विवाद में तब और तेज़ी आ गई जब Urban Company के CEO अभिराज सिंह भल ने एक बयान जारी कर अपनी कंपनी को ऐसी किसी भी प्रैक्टिस से अलग बताया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ग्राहकों का भरोसा और उनकी प्राइवेसी 'सबसे ऊपर' है।

ये हंगामा तब शुरू हुआ जब X यूज़र हर्ष उपाध्याय ने दावा किया कि Pronto के प्रोफेशनल्स 'चुनिंदा ऑप्ट-इन जॉब्स के दौरान बाहर की तरफ लगे छोटे कैमरों' का इस्तेमाल कर रहे हैं। हर्ष ने अपने वायरल पोस्ट में आरोप लगाया कि कंपनी के निवेशक Glade Brook के एक इंटरनल मेमो के मुताबिक, Pronto का मकसद इनफॉर्मल लेबर मार्केट को फॉर्मल बनाने के साथ-साथ 'फिजिकल AI और रोबोटिक्स ट्रेनिंग' के लिए कीमती डेटा तैयार करना है।

 

 

इन दावों के बाद ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि क्या AI ट्रेनिंग के लिए निजी घरों के अंदर की गतिविधियों को रिकॉर्ड करना नैतिक रूप से सही है - भले ही ग्राहक इसकी सहमति क्यों न दे दें।

बढ़ते विवाद के बीच, Pronto ने एक सफाई जारी की। कंपनी ने ज़ोर देकर कहा कि कैमरे उनके स्टैंडर्ड सर्विस मॉडल का हिस्सा नहीं हैं। कंपनी के मुताबिक, इस पायलट प्रोग्राम में सिर्फ़ वही ग्राहक शामिल हैं जो स्वेच्छा से इस प्रोग्राम को चुनते हैं और इसके लिए पैसे देते हैं।

Pronto ने अपने बयान में कहा, "जब तक आपने व्यक्तिगत रूप से प्रोग्राम के लिए ऑप्ट-इन नहीं किया है और भुगतान नहीं किया है, तब तक प्रोफ़ेशनल कैमरे के साथ घर नहीं आता।"

 

स्टार्टअप ने यह भी साफ किया कि सहमति परमानेंट नहीं है और हर बुकिंग से पहले इसे दोबारा कन्फर्म करना ज़रूरी है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि यह पायलट प्रोग्राम फिलहाल उसके सिर्फ़ 0.1% ग्राहकों को ही प्रभावित करता है और कंपनी ने भारत के DPDP (डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन) नियमों का पालन सुनिश्चित करने में महीनों लगाए हैं।

Pronto, जो सफाई, लॉन्ड्री, पोछा और बर्तन धोने जैसी ऐप-आधारित घरेलू सेवाएं देती है, ने यह भी कहा कि वो 'इस क्षेत्र की अकेली कंपनी नहीं है' जो इस तरह की उभरती टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग कर रही है।

इस बढ़ती आलोचना के बीच, Urban Company के CEO अभिराज सिंह भल ने एक कड़े शब्दों में बयान जारी किया और अपने प्लेटफॉर्म पर इस तरह के किसी भी रिकॉर्डिंग सिस्टम को लाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

भल ने लिखा, "हम भरोसे के बिजनेस में हैं।" उन्होंने आगे कहा कि Urban Company ने "अतीत में ऐसा कभी नहीं किया है" और "भविष्य में भी ऐसा करने की कोई योजना नहीं है।"

 

 

यह विवाद बेंगलुरु की ही एक और वायरल घटना के ठीक बाद सामने आया है, जिसमें एक सब्जी विक्रेता को काम करते समय सिर पर लगा आईफोन डिवाइस पहने देखा गया था। ऑनलाइन फैली इस क्लिप में दावा किया गया था कि वह विक्रेता AI ट्रेनिंग के लिए रियल-वर्ल्ड डेटा इकट्ठा कर रहा था।

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