
बेंगलुरु: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एक बार फिर अपनी सैलरी स्ट्रक्चर में हुए बदलावों को लेकर चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2024 की सैलरी में कई कर्मचारियों को उम्मीद से काफी कम वेरिएबल पे मिला है। कुछ कर्मचारियों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि उन्हें उनके वेरिएबल पे का सिर्फ 50% ही मिला है।
जब कंपनी ने 2023-24 वित्तीय वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही के लिए क्वार्टरली वेरिएबल अलाउंस (QVA) बांटा, तो कई लोगों को 60 से 80 प्रतिशत तक का पे-आउट मिला। यह पिछले दो सालों के मुकाबले बेहतर था, क्योंकि तब सिर्फ 20 से 50 प्रतिशत ही मिल रहा था। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार इसका फायदा सभी कर्मचारियों को नहीं मिला।
TCS पिछले एक साल से 'वर्क फ्रॉम ऑफिस' पॉलिसी को लेकर काफी सख्त हो गई है। नई पॉलिसी के तहत, वेरिएबल पे अब सीधे ऑफिस में आपकी अटेंडेंस से जुड़ा है। नियम के मुताबिक, 85% से ज्यादा अटेंडेंस वालों को ही पूरा वेरिएबल पे मिलेगा। जिनकी अटेंडेंस 75 से 85% के बीच है, उन्हें करीब 75% और 60 से 75% वालों को सिर्फ 50% ही मिलेगा। वहीं, 60% से कम अटेंडेंस होने पर कोई तिमाही बोनस नहीं दिया जाएगा।
कुछ कर्मचारियों की शिकायत है कि जरूरी अटेंडेंस पूरी करने के बावजूद उन्हें पूरा पैसा नहीं मिला। उनका कहना है कि बिजनेस यूनिट्स की परफॉर्मेंस का भी पे-आउट पर असर पड़ता है, जिससे उन्हें पिछले दो सालों में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसी बीच, TCS ने सालाना सैलरी बढ़ोतरी भी की, जिससे कन्फ्यूजन और बढ़ गया। कंपनी ने औसतन करीब 5% का इन्क्रीमेंट दिया, लेकिन नई CTC स्ट्रक्चर में कुछ कर्मचारियों की महीने की सैलरी पहले से थोड़ी कम हो गई। बताया जा रहा है कि इसका मुख्य कारण भारत के नए लेबर कोड के तहत ग्रेच्युटी को CTC से बाहर करना है।
जिन कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रेटिंग अच्छी थी, उन्हें 9 से 13 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी मिली, जबकि कम रेटिंग वालों को बहुत मामूली हाइक मिला। इन सब बदलावों के चलते कर्मचारियों में चिंता और बेचैनी का माहौल है।
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