
टेक डेस्क. कोरोना काल के दौरान वर्क फ्रॉम का दौर शुरू हुआ। अब टेक कंपनियां अपनी कर्मचारियों को वापस ऑफिस लाने के लिए नई पॉलिसी लागू कर रही हैं। ऐसे में एम्पलाई को खुद को ढालना होगा। कंपनियों का कहना है कि अगर कर्मचारी नए नियमों का पालन नहीं करते है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इनमें TCS, विप्रो, डेल सहित दूसरी टेक शामिल हैं।
जानिए किस कंपनी इस मामले में क्या कहा...
कॉग्निजेंट
कॉग्निजेंट ने अपने कर्मचारियों के काम पर निगरानी रखने के लिए एक ऐप डेवलप कर रही है। कंपनी के CEO रवि कुमार का कहना है कि कंपनी का लक्ष्य यह है कि एम्पलाई ऑफिस में किसी उद्देश्य के साथ आए। वह उम्मीद करते है कि कर्मचारी कम से कम तीन दिन ऑफिस में रहें।
टीसीएस
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भी एक पॉलिसी लेकर आई है। इस पॉलिसी के मुताबिक, कर्मचारियों को हर तिमाही में मिलने वाले वेरिएबल पे की रकम उनके ऑफिस में मौजूदगी पर निर्भर करेगी। इसमें वे कर्मचारी जो 60% से कम ऑफिस से काम करेंगे, उन्हें कोई वेरिएबल नहीं मिलेगा। ऑफिस में 60 से 75% अटेंडेंस वालों को 50% और 75 से 85% अटेंडेंस वाले एम्पलाई को वेरिएबल पे का 75% मिलेगा। वहीं, 85% से ज्यादा अटेंडेंस वाले कर्मचारियों को पूरा वेरिएबल मिलेगा।
डेल
डेल टेक्नोलॉजीज कर्मचारियों की अटेंडेंस की निगरानी के लिए रंग-कोडित बैज सिस्टम का इस्तेमाल करने का प्लान बना रहा रही है।
विप्रो
दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो इस मामले में अपना नरम रुख रही रही है। साबुन से लेकर सॉफ्टवेयर बनाने वाली यह कंपनी अपने कैंपस में एक्टिविटी के माध्यम से कर्मचारियों को ऑफिस लाने की कोशिश की जा रही है। विप्रो के एचआर सौरभ गोविल ने कहा कि सहयोग और नेटवर्किंग बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर की परिषद बनाई गई है।
इंफोसिस
भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी इंफोसिस चुनिंदा विभागों के कर्मचारियों को पर महीने 11 दिनों तक वर्क फ्रॉम होने की सुविधा देती है। इसके लिए कर्मचारी को आवेदन करना होता है।
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