
नयी दिल्ली: दूरसंचार क्षेत्र में चल रही उथल-पुथल के बीच ट्राई के चेयरमैन ने वोडाफोन आइडिया के सीईओ समेत दूरसंचार कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से बुधवार को मुलाकात की। इस मुलाकात का उद्देश्य उन प्राथमिकता वाले मुद्दों की पहचान करना है , जिन मुद्दों पर 2020 में नियामक द्वारा गौर किया जायेगा। सूत्रों ने कहा कि दूरसंचार उद्योग के प्रतिनिधियों ने बैठक में स्पेक्ट्रम के न्यूनतम मूल्य और समायोजित सकल आय (एजीआर) की परिभाषा सहित अन्य कई प्रमुख मुद्दों को लेकर चिंता जताई।
दूरसंचार उद्योग का एक धड़ा चाहता है कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) उद्योग की चिंताओं को दूर करने के इन मुद्दों पर विचार - विमर्श शुरू करे। पिछले महीने समायोजित सकल आय (एजीआर) पर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद यह बैठक अहम मानी जा रही है। इस फैसले के बाद दूरसंचार कंपनियों पर पिछले वैधानिक देय के रूप में 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया बन गया है।
विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप देगा
शीर्ष न्यायालय ने सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा तैयार की गई एजीआर की परिभाषा को बरकरार रखा था जबकि दूरसंचार कंपनियों की ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया। ट्राई के चेयरमैन आर . एस . शर्मा ने मीडिया से कहा , "बैठक में अगले कैलेंडर वर्ष के लिए प्राथिमकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए मुद्दों पर सामान्य चर्चा की। " शर्मा ने कहा , " दूरसंचार उद्योग ने बैठक से पहले कुछ जानकारियां दी थी और ट्राई ने भी कुछ मुद्दों की पहचान की थी ... इसलिए हमने इन दोनों सूचियों पर विचार-विमर्श किया और ट्राई के विचारों पर उद्योग से इनपुट लिया। हमने उद्योग को विशेष मुद्दों पर लिखित में दस्तावेज या पत्र देने को कहा है। "
उन्होंने कहा कि ट्राई 6-7 मुद्दों की सूची को अंतिम रूप देगा , आगामी वर्ष में नियामक द्वारा इन मुद्दों को उठाया जायेगा।
ट्राई प्रमुख ने बैठक में उठाए गए विशेष मुद्दों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। हालांकि , उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि बुधवार की चर्चा में स्पेक्ट्रम का न्यूनतम और एजीआर का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
(प्रतिकात्मक फोटो)
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