
नई दिल्ली. पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स यानी पेटा ने मीट इंडस्ट्री पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेटा का कहना है कि जूनोटिक बीमारियों के लिए मीट इंडस्ट्री जिम्मेदार है। जूनोटिक बीमारियां वे होती हैं जो जानवरों से इंसानों में होती हैं। लेकिन ये जूनोटिक बीमारियों की चर्चा अचानक क्यों होने लगी। दरअसल, करीब दो हफ्ते पहले गुरुग्राम में बर्ड फ्लू की वजह से 11 साल के बच्चे की मौत हो गई। तभी से ये चर्चा तेज है।
शाकाहारी खाने को अपनाने पर जोर
पेटा इंडिया ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि जूनोटिक रोगों के कारण न केवल मुर्गियों, बल्कि बच्चों की भी जान जा सकती है। शाकाहारी भोजन को पूरी तरह से अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में 11 साल के बच्चे की एच5एन1 बर्ड फ्लू से मौत हो गई है। पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स यानी पेटा इंडिया ने जनता को सावधान किया है कि पूरी तरह से शाकाहारी खाना अपनाने से भी इस बीमारी को फैलने से रोक सकते हैं।
पेटा इंडिया ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के पास एक बिलबोर्ड लगाया है, जहां पर बीमारी के बाच बच्चे को लाया गया था। बिलबोर्ड में मीट इंडस्ट्री को घातक एच 1 एन 1 स्वाइन फ्लू सहित जूनोटिक बीमारियों के फैलने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
60 प्रतिशत लोगों के लिए घातक है वायरस
पेटा इंडिया ने कहा कि एच5एन1 वायरस उन 60 प्रतिशत लोगों के लिए घातक है जो इसके संपर्क में आते हैं।
इस साल की शुरुआत में रूस और चीन में पोल्ट्री फार्म के श्रमिकों में एवियन इन्फ्लूएंजा के कई रूपों के साथ संक्रमण की सूचना मिली। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि बीमार या मृत पक्षियों से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। अंडे में बाहर (खोल) और अंदर (सफेद और जर्दी) दोनों पर एच 5 एन 1 वायरस हो सकता है।
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