
नई दिल्ली. देश में ठीक एक महीने पहले 5 जून को एक दिन में सबसे ज्यादा 4.12 लाख केस दर्ज किए गए थे। कोरोना की दूसरी लहर जब अपने पीक पर थी तो देश में एक्टिव केसलोड 37.41 लाख था। अधिकांश राज्यों ने कोविड -19 के मामलों में केजी से गिरावट देखी गई है। फिर भी सरकार ने पिछले शुक्रवार को कहा कि कोविड -19 महामारी की दूसरी लहर अभी तक खत्म नहीं हुई है।
नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने जोर देकर कहा, हम तब तक सुरक्षित नहीं हैं जब तक पूरा देश सुरक्षित नहीं है। लेकिन उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया। आइए जानने की कोशिश करते हैं।
देश के छह राज्य केरल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मणिपुर में अभी भी अधिक संख्या में कोरोना के केस मिल रहे हैं। देश में दैनिक मामलों की पॉजिटिविटी अनुपात 3% से नीचे आ गया है। फिर भी देश भर में 71 जिले ऐसे हैं, जहां 10% से अधिक पॉजिटिविटी अनुपात दिखा है।
भारत में औसत रोजाना केस पिछले हफ्ते 19-25 जून की तुलना में 26 जून-जुलाई 2 हफ्ते के लिए 13% की गिरावट आई है। फिर भी 100 जिलों में प्रति दिन 100 से अधिक मामले सामने आए।
क्या डेल्टा प्लस वेरिएंट इसकी वजह है?
नहीं। 30 जून तक कोविड -19 के 56 मामले डेल्टा प्लस वेरिएंट की वजह से पाए गए थे। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के माने तो ये डेल्टा प्लस वेरिएंट से बीमार लोगों की सही संख्या न हो, क्योंकि वायरस के जीनोम की मैपिंग करके कोविड -19 के सभी मामलों की जांच नहीं की जाती है। शायद यही वजह है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट के केस कम दिखाई देते हैं।
केंद्र सरकार ने क्या तैयारी की है?
केंद्र ने यह याद दिलाते हुए चेतावनी दी है कि कोविड -19 की दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है। केंद्र ने मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए छह राज्यों में डॉक्टरों और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स की टीमों को भेजा है। केंद्र सरकार ने राज्यों को उन जिलों की पहचान करने के लिए कहा है जहां साप्ताहिक मामले की पॉजिटिविटी अनुपात 10% से अधिक या अस्पताल में बिस्तर पर रहने की दर 60% से अधिक है।
अगस्त के अंत तक तीसरी लहर
कोरोना की दूसरी लहर खत्म न होने की चेतावनी ऐसे समय में आई, जब कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर अगस्त के अंत तक आ सकती है।
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