रात 12 बजते ही गोरों ने किए हिंदुस्तान के 2 टुकड़े, फिर पाकिस्तान 14 और भारत 15 अगस्त को क्यों मनाता है आजादी

Published : Aug 02, 2022, 09:09 AM IST
रात 12 बजते ही गोरों ने किए हिंदुस्तान के 2 टुकड़े, फिर पाकिस्तान 14 और भारत 15 अगस्त को क्यों मनाता है आजादी

सार

Independence Day 2022: गोरों की गुलामी से भारत और पाकिस्तान एक ही दिन और एक ही समय आजाद हुए थे। फिर भी पाकिस्तान हर साल 14 अगस्त और भारत 15 अगस्त को आजादी का जश्न क्यों मनाता है, इसे अब तक कोई समझ नहीं पाया। 

नई दिल्ली। Independence Day 2022: यह साल था 1947 का और तारीख थी 14 अगस्त। दिन ढल चुका था और रात गहराती जा रही थी। हिंदुस्तान अब भी अंग्रेजों का गुलाम था। मगर जैसे ही घड़ी की दोनों सुइयां 12 के अंक पर पहुंची यानी रात बज गए, तब अंग्रेजों ने हिंदुस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया। मगर इसी के साथ एक ऐलान और हुआ, वह यह कि हिंदुस्तान ठीक उसी समय से दो टुकड़ों में बंट गया। एक टुकड़ा पाकिस्तान कहलाया और दूसरा भारत। 

अब आप समझ गए होंगे कि भारत और पाकिस्तान को आजादी एक ही दिन एक ही समय मिली और 14 अगस्त गुजर चुका था। मगर ऐसा क्यों है कि पाकिस्तान ने आजादी का दिन एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को चुना। क्यों पाकिस्तान की घड़ियां 24 घंटे पहले बजाने लगीं। वैसा देखा जाए तो यह बात खुद पाकिस्तान वाले भी नहीं जानते, क्योंकि आज खुद जिन्ना को नहीं मालूम नहीं होगा कि उनका देश 14 अगस्त को आजादी का जश्न मनाता है, जबकि उनके जिंदा रहते यह जश्न 15 साल को मनाया गया। जी हां, चौंकिए मत। 14 अगस्त 1947 के बाद जिन्ना करीब 13 महीने जिंदा रहे। यानी दो स्वतंत्रता दिवस उन्होंने देखा। 11 सितंबर 1948 को टीबी से उनकी मौत हो गई। 

15 अगस्त वाला जिन्ना का बधाई संदेश 14 को ही सुना दिया जाता है 
पाकिस्तान के दोनों ही शुरुआती स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाए गए। बिल्कुल भारत के साथ वाले दिन, मगर उनके मरते ही पाकिस्तान की घड़ियां 24 घंटे पहले पहुंच गई और आजादी की तारीख बदलकर हो गई 14 अगस्त, वह भी सिर्फ पाकिस्तानियों के लिए। इससे भी अधिक दिलचस्प यह है कि पाकिस्तान में हर साल 14 अगस्त की सुबह यानी उनके स्वतंत्रता दिवस पर रेडियो पाकिस्तान एक संदेश सुनाता है। यह संदेश मोहम्मद अली जिन्ना का होता है, जिसे उन्होंने पाकिस्तानी की आजादी के बाद पहले स्वतंत्रता दिवस पर कहा था। इस संदेश में वे कहते हैं, 15 अगस्त की आजाद सुबह पूरे राष्ट्र को मुबारक हो, मगर आप जानकर यह हैरान होंगे कि 15 अगस्त का यह बधाई संदेश हर साल 14 अगस्त को ही सुना दिया जाता है। 

पाकिस्तानी आवाम पहले गोरों की गुलाम थी और अब अपनी ही सरकार की   
ऐसे में पाकिस्तानियों से बड़ा मूर्ख और कौन होगा, जिसने यह जानने-पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आजादी के जश्न को 24 घंटे पहले क्यों मनाते हैं, वह भी तब, जब असल में गुलाम थे। यानी साफ है कि पाकिस्तानी पहले गोरों के गुलाम थे और बीते 73 साल से अपनी सरकार के। 73 साल इसलिए क्योंकि जिन्ना के जिंदा रहते शुरुआती दो साल आजादी का जश्न 15 अगस्त को ही मनाया गया था। 

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