
जन की बात (Jan ki Baat) सर्वे एक बार फिर कर्नाटक में वापस आ गया है। जन की बात एक ऐसा प्रडिक्शन मॉडल है जो राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों की सटीक भविष्यवाणी करता है। एक बार फिर जन की बात सर्वे ने आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनावों को लेकर जनता की नब्ज टटोलने की कोाशिश की है, जिसका ओपिनियन पोल जल्द ही एशियानेट न्यूज पर देखा जा सकेगा।
क्या है Jan ki Baat Survey?
‘जन की बात’ सर्वे के माध्यम से चुनावों से पहले या चुनाव के बाद लोगों की राय जानकर संभावित परिणामों की सटीक जानकारी देता है। ये सर्वे रेंडम सैंपलिंग पर आधारित होता है जिसमें डेटा एनालिस्ट और फील्ड एक्सपर्ट्स जमीनी स्तर से जानकारियां और लोगों के विचारों को बतौर सैंपल प्राप्त कर एक निर्णय पर पहुंचते हैं। आगामी कर्नाटक चुनाव में प्रत्याशियों की घोषणा से पहले जन की बात ने 20 हजार लोगों पर ओपिनियन पोल कर जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश भी की है।
36 चुनावों की सटीक भविष्यवाणियां
जन की बात सर्वे ने 2018 के कर्नाटक चुनाव, 2019 के लोकसभा चुनाव समेत कुल 36 चुनावों की सटीक भविष्यवाणी की है। बात करें कर्नाटक चुनाव की तो Jan ki Baat सर्वे चुनावी नतीजों के बेहद करीब रहा था। इस बार भी कर्नाटक चुनाव से पहले ओपिनियन पोल (Karnataka Chunav Opinion Poll 2023) के जरिए जनता का मूड जानने की कोशिश की गई है। प्रत्याशियों की घोषणा के बाद जन की बात अपने दूसरे सर्वे की शुरुआत करेगा।
हर एंगल से किया सर्वे
इस ओपिनियन पोल में डाटा और फील्ड एक्सपर्ट्स ने कर्नाटक के सभी 6 रीजन को खंगाला है। इसमें ओल्ड मैसूर, बेंगलोर, सेंट्रल कर्नाटक, हैदराबाद कर्नाटक, मुंबई कर्नाटक और कोस्टल कर्नाटक को शामिल किया गया। जन की बात अपने सर्वे में जातिगत समीकरण, पार्टियों के वोट प्रतिशत मिलने की संभावना समेत कई फैक्टर्स बताने की भी कोशिश करता है, जो कई बार सच साबित होती है। एशियानेट न्यूज पर जल्द ही कर्नाटक के आगामी चुनावों को लेकर ओपिनियन पोल देखा जा सकेगा। बता दें कि ये सर्वे कर्नाटक में प्रत्याशियों की घोषणा से पहले किया गया था, अंतिम सर्वे प्रत्याशियों की घोषणा के बाद किया जाएगा।
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