
नई दिल्ली. कोरोना महामारी में ब्लैक फंगस को लेकर लोग काफी परेशान है। सूरत में ऐसे 8 केस मिले हैं, जहां संक्रमण से ठीक होने के बाद लोगों के आंखों की रोशनी चली गई। लेकिन नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा कि ये कोई बड़ी बीमारी नहीं है। इससे डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा खतरा है।
वीके पॉल ने कहा, ब्लैक फंगस कोविड के रोगियों में पाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और इस रोग का इलाज उपलब्ध है। ब्लैग फंगस का केस सबसे पहले दिल्ली के एक निजी अस्पताल में आया। वीके पॉल ने कहा, ब्लैक फंगस म्यूकस नाम के कवक के कारण होता है, जो गीली सतहों पर पाया जाता है। यह सबसे ज्यादा डायबिटीज के रोगियों को प्रभावित करता है।
क्यों होता है फंगल संक्रमण
वीके पॉल ने कहा कि जब कोविड -19 मरीज को ऑक्सीजन के सहारे रखा जाता है, जिसमें ह्यूमिडिफायर वाला पानी होता है, तो उस व्यक्ति में फंगल संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने चेताया कि जब कोई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहता है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ह्यूमिडिफायर से रिसाव न हो रहा हो। मरीज की स्वच्छता भी बहुत महत्वपूर्ण है।
कोविड की दवाओं पर चेताया
वीके पॉल ने कहा कि कुछ लोग कोविड-19 के लिए टोसीलिजुमाब और इटोलिजुमब का इस्तेमाल करते हैं। जिन्हें डायबिटीज है उनका सुगर कंट्रोल रहना चाहिए। स्टेरॉयड को कोविड -19 की शुरुआत में नहीं दिया जाना चाहिए। स्टेरॉयड को अनावश्यक रूप से नहीं दिया जाना चाहिए। मरीज को स्टेरॉयड छठवें दिन दिया जाना चाहिए।
फैबिफ्लु और टोसीलिजुमाब जैसी दवाओं की कमी के बारे में पूछे जाने पर वीके पॉल ने कहा, फैबिफ्लु की ऐसी कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ जगहों पर कालाबाजारी की संभावना है। पॉल ने कहा कि सरकार बड़ी मात्रा में दवा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है।
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