
लाहौर। पाकिस्तान की गरीबी दुनियाभर में मशहूर हो चुकी है। देश में फांकाकशी की नौबत आ गई है, मगर यहां की सरकार को मदद और रहम के तौर पर जो थोड़ी-बहुत आर्थिक मदद मिल रही है, उसे जनता की भलाई तथा विकास कार्यों में खर्च करने के बजाय हथियार खरीदने पर लुटाया जा रहा है, जिससे भारत के खिलाफ अघोषित युद्ध जारी रखा जाए। इस बीच, यहां गरीबी से जुड़ी एक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है।
यह खबर खुद पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल ने प्रसारित की है। इस न्यूज चैनल का नाम है समा टीवी और इसकी ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, यहां लोगों को शेर बेचे जा रहे हैं, वह भी बेहद कम कीमत पर। यह कारनामा खुद चिड़ियाघर के अधिकारी कर रहे हैं, जिन्हें शेरों को पालने की जिम्मेदारी दी गई है, मगर शेर उनके लिए इतने महंगे साबित हो रहे हैं कि वे इसे भैंसों से भी कम कीमत पर आम लोगों को बेच रहे हैं। यह कारनामा वे पहली बार नहीं कर रहे बल्कि, इससे पहले भी कई बार अंजाम दे चुके हैं।
शेरों का रखरखाव महंगा, इसलिए अधिक दाम पर इन्हें कोई खरीदना नहीं चाहता
समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर सफारी चिड़ियाघर प्रशासन अपने कुछ अफ्रीकी शेरों को डेढ़ लाख रुपए पाकिस्तानी करेंसी में बेच रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां भैंसों की कीमत भी इससे अधिक है, जितने में चिड़ियाघर प्रशासन शेरों को बेच रहा है। इसमें बताया गया है कि एक भैंस वहां साढ़े तीन लाख पाकिस्तानी करेंसी में भी बिक जाती है, जबकि शेरों को सिर्फ डेढ़ लाख पाकिस्तानी करेंसी में इसलिए बेचा जा रहा है कि इन्हें आसानी से खरीदने को कोई तैयार नहीं हो रहा। वैसे भी, जब इन शेरों को पालने में चिड़ियाघर प्रशासन का दम निकल जा रहा है, तो आम आदमी की बिसात ही क्या।
पिछले साल भी 14 शेर बेच दिए थे, जिससे चिड़ियाघर का खर्च चला सकें
टीवी रिपोर्ट के अनुसार, चिड़ियाघर प्रशासन ने अगस्त के पहले हफ्ते में 12 शेरों को बेचने की योजना बनाई है, क्योंकि वे इसे पालने में असमर्थ हैं और वे चिड़ियाघर संचालन के लिए धन भी जुटाना चाहते हैं। इन 12 शेरों में 3 शेरनियां भी शामिल हैं। प्रत्येक शेर का दाम करीब डेढ़ लाख पाकिस्तानी करेंसी लगाया गया है। चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि यहां जानवरों को रखने की लागत बढ़ती जा रही है, इसलिए उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। शेरों का पालन करना बेहद कठिन और महंगा है। एक शेर रोज 8 से दस किलो तक मांस खाता है। यह रोज जुटाना काफी महंगा है। इससे पहले भी चिड़ियाघर प्रशासन शेरों को आम लोगों को बेच चुका है। अधिकारियों का कहना है कि जब भी उनके सामने आर्थिक संकट आता है, वे शेर बेच देते हैं। पिछले साल 14 शेर बेचे गए थे, जबकि इस साल अभी सिर्फ 12 ही बेच रहे।
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