
नई दिल्ली। इस धरती पर शायद ही कोई ऐसा होगा, जो रोता नहीं होगा या फिर उसकी आंखों से आंसू नहीं आते होंगे। वैज्ञानिक इसे अच्छा मानते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, जब कोई खुश होता है या फिर दुखी होता है, दोनों ही परिस्थितियों में आंखों से पानी आते हैं। इसका मतलब यह सामान्य बात है और प्राकृतिक भी।
घड़ियाली आंसू के बारे में तो आपने सुना होगा। यह काफी पुरानी कहावत है और आज भी प्रचलित है, इसलिए हममे से ज्यादातर लोगों ने इसे जरूर सुना होगा कि घड़ियाली आंसू मत बहाओ। मगर अब जो हम आपको बताने जा रहे वह बेहद चौंकाने वाला है। क्या आप जानते हैं कि इस धरती पर कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो खाना खाते-खाते रोने लगते हैं।
क्रोकोडाइल टीयर्स सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं कुछ लोग
दावा किया जाता है कि इस धरती पर ऐसे 95 लोग हैं, जो खाना खाते-खाते रोने लगते हैं। उनके मुंह में खाने का अगर एक कौर भी गया तो उनकी आंखों से आंसू निकलने शुरू हो जाएंगे। इसका किसी तरह के स्वाद, मीठे, तीखे या नमकीन से लेना-देना नहीं है। यह तो उन्हें ऐसी बीमारी है, जो कहावत के नाम पर पड़ी है। जी हां, इस बीमारी का नाम हे क्रोकोडाइल टीयर्स सिंड्रोम यानी घड़ियाली आंसू सिंड्रोम।
खाने या पीने से इस बीमारी का कोई संबध नहीं
हालांकि, इस बीमारी का खाने या फिर इसके किसी भी तरह के स्वाद से कोई संबंध नहीं है। इस बीमारी में इंसान चाहे खाना खाए या पानी पीए, रोने लगता है। इसकी वजह है लैक्रिमल ग्लैंड। इस सिंड्रोम को गस्टो लैक्रिमेशन भी कहते हैं। कुछ खाते-पीते यह स्वत: बढ़ जाता है और आंसू गिरने लगते हैं।
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