बिजली से जुड़े करीब 80 साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा, जानिए क्या मिलने वाला है फायदा

Published : Oct 11, 2022, 01:40 PM ISTUpdated : Oct 11, 2022, 05:43 PM IST
बिजली से जुड़े करीब 80 साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा, जानिए क्या मिलने वाला है फायदा

सार

प्रोफेसर बार्टोज ए ग्रेजीबोस्की के नेतृत्व में रिसर्च टीम करीब एक दशक से रहस्य का पता लगाने की कोशिश कर रही थी और अलग-अलग स्रोतों से इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज के नकारात्मक प्रभाव से जुड़ी जानकारी जुटा रही थी। 

ट्रेंडिंग डेस्क। वैज्ञानिकों ने बिजली से जुड़े 80 साल पुराने एक रहस्य को सुलझाने में सफलता हासिल कर ली है। इस रहस्य के सुलझने के बाद हानिकारक इलेक्ट्रो स्टेटिक डिस्चार्ज को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी हाल ही में प्रकाशित हुए नेचर फिजिक्स के अंक में दी गई है। इस सफलता पूर्वक किए गए शोध में बिजली से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा हटा दिया है। 

मानव जगत के इतिहास में संपर्क विद्युतिकरण यानी कांटेक्टिंग इलेक्ट्रिसिटी बिजली का एकमात्र और प्रमुख स्रोत था। 18वीं सदी में सामने आई इस महत्वपूर्ण खोज की प्रकृति आज भी मायावी है और बहुत सी चीजों पर अब भी गहन अध्ययन किया जाना बाकी है। कांटेक्टिंग इलेक्ट्रिसिटी को लेजर प्रिंटर, एलसीडी प्रॉडक्टशन प्रॉसेस, इलेक्ट्रोस्टेटिक पेंटिंग, रीसाइक्लिंग के जरिए प्लास्टिक को अलग करने समेत कई प्रक्रियाओं में शामिल किया जाता है। 

प्लस और माइनस दोनों सतह बराबर डिस्चार्ज हो रही थी 
यही नहीं, रासायनिक संयंत्रों में कांटेक्टिंग इलेक्ट्रिसिटी के जरिए इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज प्रॉसेस का भी अहम रोल है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि दो विपरित संपर्क स्लाइडिंग चीजें एक साथ और समान रूप से चार्ज होती हैं। हालांकि, 1940 के दशक में यह देखा गया था कि प्रत्येक अलग सतह के कांटेक्टिंग इलेक्ट्रिसिटी के बाद प्लस और माइनस दोनों बराबर चार्ज हो रही हैं। इसके लिए, चार्ज मोजेक के निर्माण के प्रयोगों में नहीं बदलने वाली सपंर्क सामग्री यानी कांटेक्टिंग मटेरियल्स की मदद से होने वाले प्रॉसेस को जिम्मेदार ठहराया गया था। 

रिसर्च में हानिकारक ईएसडी को कंट्रोल करने में मदद मिली 
यूएनआईएसटी में इंस्टीट्यूट फॉर बेसिक साइंस यानी आईबीएस के सेंटर फॉर सॉफ्ट एंड लिविंग मैटर के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर बार्टोज ए ग्रेजीबोस्की के नेतृत्व में एक रिसर्च टीम करीब एक दशक से इस पर स्टडी कर रही थी। उन्होंने दस साल से भी अधिक समय तक चार्ज मोजेक के संभावित स्रोतों की जांच की। अक्टूबर महीने में नेचर फिजिक्स जर्नल में प्रकाशित हुए इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया कि गया है कि इस स्टडी से संभावित हानिकारक इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। ग्रेजीबोस्की के मुताबिक, हमारे 2011 के विज्ञान के पेपर में हमने सब-माइक्रोमीटर स्केल चार्ज को किसी गैर एकरूपता के तौर पर प्रदर्शित किया था। तब हमारी परिकल्पना इन प्लस और माइनस मोजेक में अलग होने वाली सतहों के बीच मटेरियल के ट्रांसफॉरमेशन को जिम्मेदार ठहराना था। हालांकि, इस समस्या को कई साल के काम के बाद भी हम पकड़ नहीं पा रहे थे, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि ये सूक्ष्म पैच मिलीमीटर वाली चीजें विपरित ध्रुवों पर आधारित थीं। 

मटेरियल्स को विपरित ध्रुवों पर अलग किया जा सकता है 
अब प्रोफेसर ग्रेजीबोस्की की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मोजेक ईएसडी यानी इलेक्ट्रोस्टिक डिस्चार्ज का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा, तमाम प्रयोगों के बाद यह पता चला कि इन मटेरियल्स को विपरित ध्रुवों पर अलग किया जा सकता है। इसमें स्पार्क्स के अनुक्रम बनाए जाते हैं और वे प्लस या माइनस चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने कहा, आप सोच सकते हैं कि एक डिस्चार्ज केवल मटेरियल प्रॉसेस को जीरो पर ला सकता है, लेकिन यह वास्तव में स्थानीय से उन्हें विपरित ध्रुवों में तब्दील नहीं करता। यह इस सैद्धांतिक तथ्य से जुड़ा है कि इसे बुझाने की तुलना में चिंगारी को आग में तब्दील करना काफी आसान है। 

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