Ashadh Amavasya 2022: कब है आषाढ़ मास की अमावस्या, क्यों मानते हैं इसे इतनी खास? जानिए महत्व

Published : Jun 22, 2022, 09:44 AM IST
Ashadh Amavasya 2022: कब है आषाढ़ मास की अमावस्या, क्यों मानते हैं इसे इतनी खास? जानिए महत्व

सार

हिंदू धर्म में कुछ तिथियां बहुत ही खास मानी गई हैं, अमावस्या भी इनमें से एक है। इस तिथि के स्वामी स्वयं पितृ देव है, यही कारण है कि इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि उपाय किए जाते हैं।

उज्जैन. इस समय आषाढ़ मास (ashadh month) चल रहा है जो हिंदू पंचांग का चौथा महीना है। इस महीने की अमावस्या को आषाढ़ी (Ashadh Amavasya 2022) और हलहारिणी अमावस्या (Halharini Amavasya 2022) कहते हैं, जो 28 जून, मंगलवार को है। इसके दूसरे दिन भी अमावस्या रहेगी, जो स्नान दान अमावस्या कहलाएगी। इस तरह आषाढ़ में 2 अमावस्या का योग बन रहा है। हलहारिणी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है क्योंकि इसे कृषि से जोड़कर देखा जाता है। आगे जानिए हलहारिणी अमावस्या का महत्व और कब से कब तक रहेगी ये तिथि…  

कब से कब तक रहेगी अमावस्या तिथि?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि  28 जून, मंगलवार की सुबह 05:53 से शुरू होकर 29 जून, बुधवार की सुबह 08:23 तक रहेगी। 

हलहारिणी अमावस्या का महत्व (Significance of Halahari Amavasya)
आषाढ़ी अमावस्या वर्षा ऋतु के दौरान आती है। इस दिन हल और खेती के अन्य उपकरणों की पूजा करने की भी परंपरा है। इसलिए इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। ज्योतिष के नजरिये से इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में आ जाते हैं। ज्योतिष में सूर्य को धर्म-कर्म का स्वामी बताया गया है और चंद्रमा को मन का। इसलिए इस दिन किए गए धार्मिक कामों से आध्यात्मिक शक्ति और बढ़ जाती है। अमावस्या को महत्वपूर्ण खरीदी-बिक्री और हर तरह के मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। हालांकि इस तिथि में पूजा पाठ और स्नान-दान का विशेष महत्व है। 

पितृ तर्पण के लिए खास है ये तिथि
आषाढ़ी अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष वे यदि इस दिन कुछ विशेष उपाय या श्राद्ध आदि करें तो उनकी परेशानियां दूर हो सकती हैं। अगर ये उपाय भी कोई न कर पाएं तो सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान कर पितरों के निमित्त जल दान करना चाहिए। ये भी पितृ दोष का आसान उपाय है। यह तिथि पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक मानी गई है। अत: पितृ कर्म के लिए यह तिथि बेहद शुभ मानी जाती है।


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