परंपरा: भगवान श्रीगणेश का प्रतीक है स्वास्तिक, इसके उपायों से घर में बनी रहती है सुख-समृद्धि

Published : Jun 30, 2021, 09:49 AM ISTUpdated : Jun 30, 2021, 12:21 PM IST
परंपरा: भगवान श्रीगणेश का प्रतीक है स्वास्तिक, इसके उपायों से घर में बनी रहती है सुख-समृद्धि

सार

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी शुभता के देवता है और प्रथम पूजनीय हैं इसलिए भी हर कार्य से पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाना आवश्यक रूप से बनाया जाता है।

उज्जैन. हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी शुभता के देवता है और प्रथम पूजनीय हैं इसलिए भी हर कार्य से पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाना आवश्यक रूप से बनाया जाता है। खासतौर पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा में स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। आगे जानिए स्वास्तिक से जुड़ी खास बातें…

- सामान्यतः स्वास्तिक दो रेखाओं द्वारा बनाया जाता है जो एक दूसरे को काटती हुई होती हैं। जो आगे बढ़कर मुड़ जाती हैं और इसकी चार भुजाएं बन जाती हैं। जिस स्वास्तिक में रेखाएं आगे की ओर इंगित करती हुई दायीं ओर मुड़ती हैं वह स्वास्तिक शुभ माना जाता है।
- ऋग्वेद में स्वास्तिक को सूर्य माना गया है और उसकी चारों भुजाओं को चार दिशाओं की उपमा दी गई है।
- इसके अलावा स्वास्तिक के मध्य भाग को विष्णु की कमल नाभि और रेखाओं को ब्रह्माजी के चार मुख, चार हाथ और चार वेदों के रूप में भी निरूपित किया जाता है।
- अन्य ग्रंथो में स्वास्तिक को चार युग, चार आश्रम (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का प्रतीक भी माना गया है। यह मांगलिक विलक्षण चिन्ह अनादि काल से ही संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त रहा है।
- ज्यादातर स्वास्तिक को रोली या लाल कुमकुम से बनाया जाता है, क्योंकि हिंदू धर्म में लाल रंग को शुभ माना जाता है।
- इसके अलावा सिंदूर से भी स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है। लोग आजकल बाजार से बने बनाए स्वास्तिक के चिह्न लाकर लगा लेते हैं लेकिन यह सही नहीं रहता है। स्वास्तिक सदैव स्वयं अंकित करना चाहिए।

स्वस्तिक के उपाय
1. वास्तु में भी स्वास्तिक के चिह्न का बहुत महत्व माना गया है। यदि किसी के मुख्य द्वार में किसी प्रकार का दोष हो तो उसे अपने द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है। माना जाता है कि इससे वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है और आपके घर में सुख-समृद्धि एवं शुभता बनी रहती है।
2. यदि किसी को व्यापार में लगातार हानि का सामना करना पड़ रहा है व्यापार स्थल के ईशान कोण में लगातार 7 गुरुवार तक सूखी हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए। इससे आपके व्यापार की समस्याएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और कार्यक्षेत्र में फायदा होता है।
3. कार्यों में सफलता प्राप्ति को लिए घर की उत्तरी दिशा में सूखी हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ रहता है। माना जाता है कि इससे कार्यों में आने वाली अड़चने दूर होने लगती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

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