चिन्मयानंद केस:HC ने खारिज की छात्रा की गिरफ्तारी पर रोक की याचिका, पीड़िता की इस मांग को भी नकारा

Published : Sep 23, 2019, 04:56 PM ISTUpdated : Sep 23, 2019, 05:23 PM IST
चिन्मयानंद केस:HC ने खारिज की छात्रा की गिरफ्तारी पर रोक की याचिका, पीड़िता की इस मांग को भी नकारा

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिन्मयानंद यौन उत्पीड़न मामले में पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की अर्जी पर किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है।

प्रयागराज (Uttar Pradesh). इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिन्मयानंद यौन उत्पीड़न मामले में पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की अर्जी पर किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट द्वारा इस मामले का खुद संज्ञान लिए जाने के बाद न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और मंजू रानी चौहान की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। वहीं, यौन शोषण मामले में एसआईटी ने कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट सौंप दी है। जिसपर कोर्ट ने संतोष जताया हुए आगे की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 22 अक्टूबर, 2019 की तारीख तय की है।

छात्रा की याचिका पर कोर्ट ने की ये टिप्पणी
बता दें, पीड़ित छात्रा ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़ित छात्रा इस संबंध में कोई राहत चाहती है, तो वह उचित पीठ के समक्ष नई याचिका दायर कर सकती है। यह पीठ इस मामले में केवल जांच की निगरानी करने के लिए नामित की गई है। गिरफ्तारी के मामले में रोक लगाने का कोई आदेश पारित करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। बता दें, सुनवाई के दौरान पीड़ित छात्रा भी कोर्ट में मौजूद थी। 

पीड़ित छात्रा ने दोबारा बयान दर्ज करने की रखी मांग
कोर्ट के समक्ष पीड़ित छात्रा ने दूसरी प्रार्थना यह की थी कि मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया बयान ठीक नहीं था। उसे नया बयान दर्ज कराने की अनुमति दी जाए। लेकिन कोर्ट ने उसकी यह प्रार्थना भी स्वीकार नहीं की। कोर्ट का कहना था कि नये बयान के लिए आवेदन में संबंधित मजिस्ट्रेट के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है और न ही पीड़ित छात्रा का नया बयान दर्ज कराने के लिए कोई प्रावधान दर्शाया गया है। सिर्फ यह आरोप लगाया गया है कि उसके बयान के प्रत्येक पेज पर उसके हस्ताक्षर नहीं लिए गए और सिर्फ आखिरी पेज पर हस्ताक्षर लिये गये। उसका बयान दर्ज किए जाते समय एक महिला मौजूद थी। 

इस पर कोर्ट ने कहा कि उस महिला द्वारा किसी तरह का हस्तक्षेप किए जाने संबंधी आरोप न होने से ऐसा लगता है कि चैंबर में महिला की मौजूदगी सिर्फ इसलिए थी ताकि पीड़ित छात्रा अपना बयान दर्ज कराने के दौरान सहज और सुरक्षित महसूस कर सके। इसके अलावा पीड़ित छात्रा ने अपने आवेदन में एसआईटी द्वारा जांच में किसी तरह की अनियमितता का आरोप नहीं लगाया है।

SIT ने दिए थे छात्रा की गिरफ्तारी के संकेत
एसआईटी चीफ नवीन अरोड़ा ने बीते शुक्रवार को चिन्मयानंद और रंगदारी मांगने के आरोप में पीड़िता के तीन दोस्तों को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया था, जिसके बाद कोर्ट ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत मे भेज दिया था। नवीन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने बताया था कि उनके पास मिस A (पीड़ित छात्रा) के खिलाफ भी पुख्ता सुबूत हैं। वह सुबूत स्वामी चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के संबंध में हैं। इसलिए जांच चल रही है। पीड़िता की भी गिरफ्तारी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को दिया था निर्देश 
बता दें, छात्रा द्वारा चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर, 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट को जांच की निगरानी का निर्देश दिया था। साथ ही पीड़िता छात्रा के परिजनों की सुरक्षा को देखने को कहा था। इससे पहले, हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि विशेष जांच टीम (एसआईटी) का एक जिम्मेदार सदस्य जांच की प्रगति की रिपोर्ट दाखिल करेगा। अपर पुलिस अधीक्षक अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट पेश की।

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