संगम किनारे टेंट में बसा 'शहर', कल्पवासी एक महीने तंबू के अंदर करते क्या हैं?

Published : Jan 15, 2020, 03:11 PM ISTUpdated : Jan 15, 2020, 11:47 PM IST
संगम किनारे टेंट में बसा 'शहर', कल्पवासी एक महीने तंबू के अंदर करते क्या हैं?

सार

प्रयागराज(Uttar Pradesh ). संगम की रेती पर इन दिनों माघमेले का कल्पवास चल रहा है। देश के तमाम स्थानों से साधु संत  श्रद्धालु यहां कल्पवास के लिए पहुंचे हैं। लेकिन कल्पवास आखिर में होता क्या है ये अभी भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय है। ASIANET NEWS HINDI ने प्रयागराज के माघमेले में कल्पवास कर रहे बुजुर्ग दुर्गा प्रसाद तिवारी और सुशीला देवी से बात की। इस दौरान उन्होंने  कल्पवासियों की दिनचर्या के बारे में हमसे बात की।   

प्रयागराज(Uttar Pradesh ). संगम की रेती पर इन दिनों माघमेले का कल्पवास चल रहा है। देश के तमाम स्थानों से साधु संत  श्रद्धालु यहां कल्पवास के लिए पहुंचे हैं। लेकिन कल्पवास आखिर में होता क्या है ये अभी भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय है। ASIANET NEWS HINDI ने प्रयागराज के माघमेले में कल्पवास कर रहे बुजुर्ग दुर्गा प्रसाद तिवारी और सुशीला देवी से बात की। इस दौरान उन्होंने  कल्पवासियों की दिनचर्या के बारे में हमसे बात की। 

प्रयागराज के माघमेले में  गंगा किनारे दूर-दूर से लोग आए हुए हैं। लोग यहां एक महीने तक कल्पवास कर पुण्य कमा रहे हैं। लोगों का मानना है कि कल्पवास करने से मनुष्य को मुक्ति मिल जाती है। गंगा के दोनों किनारों पर हजारों तम्बू लगे हुए हैं। जिसमे लोग रहकर एक महीने तक कल्पवास करेंगे। 

क्षौरकर्म के साथ होती है कल्पवास की शुरुआत
संगम किनारे कल्पवास कर रहे बुजुर्ग दुर्गा प्रसाद तिवारी बताते हैं कि "हम लोग यहां पौष पूर्णिमा के दो दिन पहले आ गए थे। यहां आने के बाद सबसे पहले पुरुष कल्पवासियों को क्षौरकर्म(मुंडन) कराना होता है।  उसके बाद ही उनका कल्पवास शुरू होता है। इसके आलावा दिन में कम से कम दो बार गंगा स्नान भी कल्पवास में बेहद आवश्यक होता है।कल्पवास खत्म होने के बाद हमें फिर से मुंडन कराना पड़ता है " 

भोर में स्नान के बाद शुरू होती है है कल्पवासियों की दिनचर्या 
कल्पवासी दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया "भोर में 4 बजे गंगा स्नान के बाद हमारी दिनचर्या शुरू हो जाती है। गंगा स्नान के बाद हम लोग बड़े हनुमान जी का दर्शन करते हैं। इसके बाद हम अपने टेंट में आकर पूजा पाठ करते हैं। पूजा आदि के बाद हम नाश्ता करते हैं और फिर शिविरों में चल रहे रामकथा या श्रीमद भागवत की कथा सुनने के लिए निकल जाते हैं। 

दिन में में एक बार ही होता है भोजन 
कल्पवासी सुशीला देवी ने बताया कि हम लोग कल्पवास के दौरान दिन में एक बार ही भोजन करते हैं। जबकि एक बार फलाहार करते हैं। फलाहार में उबले हुए आलू, मूंगफली,फल आदि लेते हैं। उसके बाद हम अपने पूजा पाठ में लग जाते हैं। 

एक माह में खत्म करना  होता है रामचरित मानस व गीता 
माघ मेले में अपने पति साथ कल्पवास कर रही सुशीला तिवारी ने बताया " हमें एक महीने के कल्पवास के अंदर ही राम चरित मानस व श्रीमदभागवत गीता पूरा पढ़ना पड़ता है। ये मास परायण होता है। हम लोग रोजाना एक पाठ पढ़ते हैं जिससे एक माह में पूरी गीता व रामायण खत्म हो जाए। 

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