अपनी इन खूबियों के चलते मुलायम सिंह यादव परिवार को हमेशा याद आएंगी साधना गुप्ता

Published : Jul 10, 2022, 12:45 PM ISTUpdated : Jul 10, 2022, 02:16 PM IST
अपनी इन खूबियों के चलते मुलायम सिंह यादव परिवार को हमेशा याद आएंगी साधना गुप्ता

सार

मुलायम सिंह यादव की पत्नी साधना गुप्ता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। मुलायम परिवार हमेशा ही उन्हें याद करता रहेगा। वह हमेशा पारिवारिक समारोह में पहले पहुंचती थी और जिम्मेदारियां निभाती थी। पारिवारिक कलह में उन्होंने अखिलेश और प्रतीक को अपनी दो आंखे बताया था।

लखनऊ: सपा संरक्षक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी मौत की खबर आते ही नेताजी के पैतृक गांव सैफई में शोक की लहर देखी गई। साधना का सैफई से लंबा जुड़ाव था। मुलायम के परिवार में कोई भी समारोह हो तो वह कार्यक्रम में जिम्मेदारियों के लिए सबसे पहले पहुंचती थीं। जब परिवार की कलह सामने आई तो उन्होंने अखिलेश यादव और प्रतीक यादव दोनों ही बेटों को अपना अनमोल रतन बताया। उन्होंने कहा था कि अखिलेश और प्रतीक उनकी दो आंखें हैं। 

मतदान से लेकर परिवार के समारोह में हुईं शामिल
कोई भी चुनाव हो साधना गुप्ता बेटे प्रतीक और बहू अपर्णा बिष्ट के साथ में मतदान के लिए पहुंचती थी। बात अगर 2012 के चुनाव की हो तो उस दौरान भी वह मतदान के लिए पहुंची थी। हालांकि बीते कुछ चुनावों में स्वास्थ्य ठीक न होने के चलते वह मतदान के लिए नहीं पहुंची। सैफई की मतदाता सूची में डीएचपी 2648400 नंबर पर उनका नाम दर्ज है। 26 अप्रैल 2014 को जब मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह का निधन हुआ तो भी साधना को महिला सदस्यों के साथ भीड़ में बैठे हुए देखा गया। प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव की बेटी डॉ. अनुभा का विवाह हुआ तो उसमें भी साधना गुप्ता की मौजूदगी देखी गई। मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह तेज प्रताप यादव के विवाह समारोह में साल 2015 में भी उनकी मौजदगी रही। शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव की मार्च 2016 में हुई शादी में भी उन्होंने सभी जिम्मेदारियों का निर्वाहन किया। हालांकि साल 2021 में तेज प्रताप यादव की बहन की शादी में वह स्वास्थ्य कारणों के चलते शामिल नहीं हो सकी थीं। 

साधना गुप्ता को लकी मानते थे मुलायम
परिवार के साथ ही मुलायम सिंह यादव भी साधना गुप्ता को लकी मानते थे। इसका सबसे बड़ा कारण था कि साधना 1988 में मुलायम सिंह यादव के जीवन में आई थीं। इसके बाद 1989 में ही मुलायम प्रदेश के सीएम बन गए थे। साधना की एंट्री के बाद ही प्रदेश के सीएम की कुर्सी मिलने पर मुलायम ने मान लिया की साधना गुप्ता ही गुडलक लेकर आई हैं। हालांकि इसके बाद भी साधना को मुलायम के जीवन में आने के आधिकारिक ऐलान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा था। 

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