शादीशुदा बेटियों को मायके में मिले खेतिहर जमीन, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, राज्य सरकार से मांगा जवाब

Published : Jul 07, 2022, 11:19 AM IST
शादीशुदा बेटियों को मायके में मिले खेतिहर जमीन, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, राज्य सरकार से मांगा जवाब

सार

यूपी के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादीशुदा बेटियों के लिए अहम टिपण्णी की है। कोर्ट ने शादीशुदा बेटियों को भी मायके में कृषि जमीन मिले। इसे लेकर कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को नोटिस जारी किया और सरकार से जवाब मांगा है।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के जिले प्रयागराज में स्थिति इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। दरअसल शादीशुदा बेटियों को माता-पिता की कृषि जमीन यानी मायके में खेतिहर जमीन में हिस्सा दिए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका में कोर्ट द्वारा टिप्पणी की है। कोर्ट में दाखिल याचिका में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादीशुदा बेटियों को भी मायके में खेतिहर भूमि मिलनी चाहिए। जौनपुर की याची बेटियों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राजस्व संहिता के प्रावधानों को चुनौती है। 

राजस्व की इन धाराओं पर मिले शादीशुदा महिलाओं को अधिकार
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल को नोटिस भी जारी किया है साथ ही सरकार से जवाब मांगा है। जानकारी के अनुसार जौनपुर की विवाहित बेटियों ने पीआईएल दाखिल कर राजस्व संहिता 2006 की धाराओं को संवैधानिकता को चुनौती दी है। याचिकाकार्ता ने अपनी याचिका में कहा कि राजस्व संहिता की धाराएं  4(10), 108, 109 और 110 में शादीशुदा महिलाओं को संविधान मिले है। लेकिन मौलिक अधिकारों- संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(जी), 21 और 300 ए- का उल्लंघन करता है।

शादीशुदा बेटियों को राजस्व संहिता की धाराओं से रखा गया बाहर
इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने आगे कहा कि राजस्व संहिता की धाराएं 108, 109 और 110 में विवाहित बेटियों को कृषि भूमि के उत्तराधिकार के क्रम में अविवाहित बेटियों, पुरुष वंशजों और विधवाओं के मुकाबले भेदभाव करती हैं क्योंकि शादीशुदा बेटियों को इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। इतना ही नहीं वरीयता क्रम में बहुत नीचे रखा गया है। जबकि उत्तराधिकारियों की अनुपस्थिति में शादीशुदा बेटियों को विरासत का हिस्सा माना जाता है। दोनों याचिकाकर्ताओं ने राजस्व संहिता की इन धाराओं को रद्द कर शादीशुदा बेटियों को भी उसके माता-पिता की कृषि भूमि में हिस्सा देने की मांग की है। इस याचिका पर चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जे जे मुनीर की खंडपीठ में बुधवार को सुनवाई हुई। इसको दाखिल करने वाली खादिजा फारूकी व अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। 

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