
हटके डेस्क। पश्चिम बंगाल के चंदन नगर का रहने वाला गौरव अधिकारी नाम का एक युवक अपनी 45 साल की विधवा मां के लिए करीब 50 साल का दूल्हा तलाश रहा है। उसने इसे लेकर फेसबुक पर पोस्ट डाली है। पोस्ट में उसने लिखा है कि मुझे अपनी विधवा मां डोला अधिकारी के लिए एक योग्य वर चाहिए। मैं रोजगार के लिए ज्यादा समय बाहर रहता हूं। मेरी मां को अकेले समय गुजारना पड़ता है। उन्हें जीवनसाथी की जरूरत है। गौरव अधिकारी की यह फेसबुक पोस्ट वायरल हो गई है और वह चर्चा में आ गया है। इस पर उसकी मां की क्या प्रतिक्रिया है, इसका तो पता नहीं चला है, लेकिन पोस्ट वायरल होते ही उसके पास उसकी मां से शादी करने के लिए लोगों के फोन आने लगे हैं, जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और तरह-तरह के लोग शामिल हैं।
जीवनसाथी का होना जरूरी
गौरव के पिता कुल्टी में नौकरी करते थे। साल 2014 में उनकी मृत्यु हो गई। गौरव इकलौती संतान हैं। तब से उनकी मां अकेले ही रह रही हैं। गौरव चाहते हैं कि उनकी मां शादी कर लें। इससे उनके जीवन में खुशहाली आएगी। वैसे, वह अपना ज्यादातर समय पुस्तकें पढ़ कर और संगीत सुन कर गुजारती हैं, लेकिन गौरव का कहना है कि जीवनसाथी का होना जरूरी है। गौरव का कहना है कि लोग भले ही उनका मजाक उड़ाएं, लेकिन वे अपनी मां की शादी कराने को लेकर गंभीर हैं।
कैसे आ रहे रिएक्शन
कुछ लोग गौरव की इस पोस्ट पर उनका मजाक भी उड़ा रहे हैं। लेकिन गौरव को इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा है कि चर्चित होने के लिए उन्होंने यह पोस्ट नहीं लिखी है। वे सच में अपनी मां की शादी करवाना चाहते हैं। कई लोग गौरव के इस प्रयास की सराहना भी कर रहे हैं। चंदन नगर के बऊबाजार में रहने वाले शुभमय दत्त का कहना है कि यह एक अच्छी बात है। कम उम्र में पति या पत्नी का निधन हो जाने पर दूसरी शादी करने का विचार बुरा नहीं है। एक वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य सोमेन भट्टाचार्य का भी कहना है कि यह अच्छी पहल है और इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
एक लड़की ने भी अपनी मां की शादी के लिए की थी पहल
गौरव से पहले इसी महीने आस्था नाम की एक लड़की ने भी अपनी मां की शादी कराने के लिए ट्वीट किया था जो वायरल हो गया था। उस समय भी लोगों ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं जाहिर की थीं। बहुत से लोगों का मानना है कि इससे नई पीढ़ी की बदलती मानसिकता का संकेत मिलता है। वैसे, बहुत से लोग इसे पसंद नहीं भी करते और गलत मानते हैं। उनका कहना है कि इससे घरवालों को शर्मिंदगी महसूस होती है।
बंगाल में रही है विधवा विवाह की परंपरा
बंगाल वह राज्य है जहां विधवा विवाह के लिए ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने बड़ा आंदोलन चलाया था और भारी विरोध के बावजूद इसे स्वीकृति दिलाई थी। उनके प्रयासों की वजह से ही 16 जुलाई, 1856 को देश में विधवा विवाह को कानूनी तौर पर मान्यता मिली थी। उन्होंने अपने बड़े बेटे की शादी भी एक विधवा से ही कराई थी। लेकिन आज भी पश्चिम बंगाल में विथवाओं की संख्या में कमी नहीं आई है। बनारस और वृंदावन के विधवा आश्रमों में बंगाल की विधावाएं बड़ी संख्या में मिलती हैं। ऐसे में, गौरव अधिकारी ने अपनी विधावा मां की शादी कराने की जो पहल की है, उसका बहुत से लोग स्वागत कर रहे हैं।
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