
इराक: अमेरिका हमेशा अपने दुश्मनों को याद रखता है। भले ही उससे बदला लेने में कुछ साल लग जाए, लेकिन अमेरिका अपने दुश्मनों को भूलता नहीं है। इस कड़ी में अमेरिका ने कासिम सुलेमानी को मौत की नींद सुला दिया है। कासिम, जो बीते 40 सालों से अमेरिका के खिलाफ बोलता आया था और जो हर मौके पर अमेरिका के खिलाफ कार्य करता था, उसकी मौत डॉनल्ड ट्रंप के इशारे पर कर दी गई।
कौन था कसीम सुलेमानी?
बता दें कि कासिम सुलेमानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्पोरेशन का मेजर जनरल था और 1998 से अब तक वह ईरानी सेना का कमांडर के पद पर तैनात था। अमेरिका के लिए कासिम बीते 40 सालों से सिर दर्द था।इराक के कद्स फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी का काफिला बगदाद एयरपोर्ट की तरफ बढ़ रहा था उसी दौरान अमेरिकी सेना ने रॉकेट लॉन्चर से हवाई हमला कर दिया। इस हमले में सुलेमानी के अलावा इरान समर्थित सेना के डिप्टी कमांडर अबू मेहदी अल मुहादिस के भी मारे जाने की भी बात कही जा रही है।
इसलिए बन बैठा था अमेरिका का दुश्मन
सुलेमानी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का विरोधी था और कई बार उसने कई मौकों पर अमेरिका के खिलाफ एक्शन लिए थे। 1980 के दशक में जब ईरान और इराक के बीच भयंकर युद्ध छिड़ा था, उस समय अमेरिका ने इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन की मदद की थी। बस तब से ही सुलेमानी और अमेरिका के बीच दुश्मनी का सिलसिला जारी था। जिसका अंत अमेरिका ने सुलेमानी की जान लेकर की।
अमेरिका को था सुलेमानी से खतरा
सुलेमानी आईएस के खिलाफ कुर्द लड़ाके तैयार करता था। इराक को आतंकवादी इस्लामिक स्टेट से बचाने के लिए सुलेमानी ने बड़े कदम उठाए थे। उसने ईरान समर्थित पॉप्युलर मोबिलाइजेशन फोर्स का गठन किया था जिसका डिप्टी कमांडर मुहादिस को बनाया था। सुलेमानी धीरे-धीरे अपनी पकड़ दूसरे इस्लामिक देशों तक बना रहा था, जिसके कारण अमेरिका को चिंता थी। इस कारण उसने सुलेमानी को मारने का मास्टर प्लान बना लिया था।
ट्रंप ने दिया था मौत का आदेश
सुलेमानी की मौत का आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था। व्हाइट हाउस द्वारा जारी टट्वीट में साफ़ लिखा गया है कि इस अटैक का आदेश ट्रंप ने ही दिया था।
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