पोप फ्रांसिस के निधन के बाद ईसाई समुदाय में शोक, कौन होगा अगला पोप? जानिए 15 संभावित कार्डिनल्स की सूची

Published : Apr 22, 2025, 11:31 AM IST
कौन होगा अगला पोप?

सार

Next Pope Francis List: पोप फ्रांसिस के निधन के बाद नए पोप चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दुनिया भर से 15 कार्डिनल अगले पोप बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। 

Next Pope Francis List: ईसाइयों की दुनिया के सबसे बड़े धर्मगुरू पोप फ्रांसिस के ईस्टर पर 88 वर्ष की आयु में निधन के बाद समूचा ईसाई समुदाय शोक में डूबा है। इसी के साथ नया पोप चुनने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। चाहे वे राजनयिक हों, धर्मशास्त्री, मध्यस्थ या वेटिकन के आंतरिक जानकार हों। यहां 15 कार्डिनलों की सूची दी गई है, जिन्हें अगला पोप बनने के संभावित पसंदीदा उम्मीदवारों में माना जा रहा है। इन्हें "पापाबिली" कहा जाता है, और सूची को क्षेत्रवार विभाजित किया गया है।

हालांकि, यह सूची किसी भी तरह से पूरी नहीं है और पोप फ्रांसिस का उत्तराधिकारी कोई और भी हो सकता है।

पिएत्रो पारोलिन (इटली) 

पिएत्रो पारोलिन वेटिकन के प्रमुख राजनयिक हैं। पोप फ़्रांसिस के लगभग समूचे कार्यकाल के दौरान पारोलिन वेटिकन में नंबर दो बनें रहे हैं। उनका दुनिया के कई बड़े नेताओं से परिचय है और वो समूचे विश्व की यात्राएं कर चुके हैं। उन्हें वेटिकन की सरकार के भीतर भी बहुत से लोग पसंद करते हैं।

पारोलिन फ्रांस के कार्डिनल परिषद के सदस्य भी हैं। ये एक सलाहकार समिति है। 2018 में चीन और वेटिनक के बीच बिशपों की नियुक्ति के लिए हुए ऐतिहासिक समझौते में पारोलिन ने अहम भूमिका निभाई थी।

पिएरबातिस्ता पिज्जाबल्ला (इटली) 

पिएरबातिस्ता मध्यपूर्व के शीर्ष कैथोलिक पादरी हैं। उनके प्रभाव क्षेत्र में इसराइल, फ़लस्तीनी इलाके, जॉर्डन और साइपरस आते हैं। उन्हें हमास और इसराइल के बीच युद्ध शुरू होने के कुछ दिन पहले ही सितंबर 2023 में कार्डिनल बनाया गया था। पिएरबातिस्ता ने इसराइल और हमास दोनों से ही शांति की अपील की है और 2024 का क्रिसमस उन्होंने गजा और यरुशलम दोनों जगह मनाया था।

मात्तेओ मारिया जुप्पी (इटली) 

सेंट एगीडियो में रोमन कैथोलिक समुदाय के सदस्य रहे जुप्पी पिछले तीन से अधिक दशकों से वेटिकन के गुप्त राजनयिक की भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन के लिए पोप फ्रांसिस के विशेष शांतिदूत की भूमिका भी निभाई है। उन्हें बोलोन्या शहर में साइकिल चलाते हुए देखा जाता रहा है। वो कैथोलिक चर्च में समलैंगिक और प्रवासियों का स्वागत करने के लिए भी जाना जाता है।

क्लाउदियो गुगेरोत्ती (इटली)

इटली के वेरोना शहर से आने वाले क्लाउदियो राजनयिक हैं और कई भाषाएं बोलते हैं। उन्हें स्लाविक दुनिया का विशेषज्ञ माना जाता है। वो ब्रिटेन, जार्जिया, अर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस और यूक्रेन में होली सी के दूत रह चुके हैं। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध के दौरान पोप फ्रांसिस उनसे सलाह लेते रहे थे।

ज्यां-मार्क अवेलीन (फ्रांस) 

अल्जीरिया में पैदा हुए ज्यां मार्क ने अपने जीवन का अधिकतम समय फ्रांस के तटीय शहर मारसीले में बिताया है। उन्हें पोप फ्रांसिस का करीबी दोस्त माना जाता है। ज्यां मार्क को साल 2022 में कार्डिनल बनाया गया था। ज्यां मार्क संस्कृति और धर्म के बीच वार्ता की वकालत रहे हैं। उन्हें प्रवासी अधिकारों की वकालत के लिए भी जाना जाता है।

आंडर्स आर्बोरेलियस (स्वीडन) 

आंडर्स आर्बेरेलियस को साल 2017 में स्वीडन का पहला कार्डिनल नियुक्त किया गया था। एक प्रोटेस्टेंट बहुल देश के रहने वाले विचार बदलकर कैथोलिक बनें थे। पोप फ्रांसिस की तरह ही आंडर्स भी प्रवासियों के यूरोप में स्वागत करने की वकालत करते हैं।

मारियो ग्रेक (माल्टा)

ग्रेक बिशपों की सभा के महासचिव हैं। यह एक ऐसा निकाय है जो स्थानीय चर्चों से महिलाओं की भूमिका हो या तलाकशुदा लोगों का स्थान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी एकत्र करता है और उसे पोप तक पहुंचाता है। उन्हें पोप फ्रांसिस के नेतृत्व में एक खुली और संवेदनशील कलीसिया बनाने के प्रयासों और साथ ही परंपरावादियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलन साधने का कठिन कार्य करना पड़ा है। उन्होंने सभी स्तरों के कैथोलिकों के बीच भाईचारेपूर्ण संवाद को स्वीकार किया है, जबकि परंपरावादियों को यह आश्वासन भी दिया है कि कलीसिया कोई लोकतंत्र नहीं है कलीसिया पदानुक्रमित है।

पीटर एर्डो (हंगरी) 

पीटर एड्रो कैनन लॉ के विद्वान हैं और सात भाषाएं बोलते हैं। उन्होंने 25 से अधिक किताबें प्रकाशित की हैं। हालांकि वो प्रवासियों के प्रति कट्टर नजरिया रखने वाले हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान के करीबी हैं और इस मामले में उनके विचार पोप फ्रांसिस से टकराव रखते हैं। पीटर एड्रो समलैंगिक संबंधों और दोबारा शादी जैसे मुद्दों पर भी रूढ़ीवादी विचार रखते हैं।

ज्यां-क्लोद होलरिच (लक्जमबर्ग) 

ज्यां क्लोद पोप फ्रांसिस की तरह ही एक जेसुइट हैं और उन्होंने जापान में बीस साल बिताए हैं। वो जर्मन साहित्य और यूरोप-एशियाई संस्कृति के विशेषज्ञ हैं। ज्यां क्लोद होलरिच पर्यावरण की भी वकालत करते रहे हैं।

लुइस अंतोनियो टैगले (फिलीपींस)

लुइस अंतोनियो एशिया की तरफ से पोप बनने वालों की सूची में सबसे आगे हैं। खुले विचारों वाले लुइस चर्च की आलोचना से भी पीछे हटते हैं, खासकर बच्चों के यौन शोषण जैसे मुद्दों पर। अच्छी अंग्रेजी बोलने वाले लुइस पोप फ्रांसिस की तरह ही गरीबों, प्रवासियों और पिछड़े तबके के लोगों की वकालत करते हैं। उन्होंने पोप बेनेडिक्ट ने साल 2012 में कार्डिनल बनाया था। साल 2013 में जब पोप फ्रांसिस को पोप चुना गया था तब उन्हें भी एक उम्मीदवार माना गया था।

चार्ल्स माउंग बो (म्यांमार) 

माउंग बो को पोप फ्रांसिस ने साल 2015 में कार्डिनल बनाया था। वो म्यांमार से आने वाले पहले कार्डिनल हैं।बो ने म्यांमार में गृहयुद्ध समाप्त करने के लिए शांति प्रयास भी किए हैं। उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों का बचाव करते हुए उन्हें नसलीय नरसंहार का पीड़ित बताया है।

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