पाक के पूर्व प्रधानमंत्री पर अरबों के घोटाले का आरोप, अब हुई कार्रवाई

Published : Jul 18, 2019, 04:57 PM IST
पाक के पूर्व प्रधानमंत्री पर अरबों के घोटाले का आरोप, अब हुई कार्रवाई

सार

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नेता शाहिद खाकन अब्बासी को अरेस्ट कर लिया गया है। 

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नेता शाहिद खाकन अब्बासी को अरेस्ट कर लिया गया है। नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने ये कार्रवाई की। उनपर एलएनजी के इंपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट में अरबों रुपए के घोटाले का आरोप है। अब नैब उन्हें फिजिकल रिमांड के लिए अकाउंटेबिलिटी कोर्ट में पेश करेगी। जिसके बाद उनका मेडिकल प्रशिक्षण होगा। वहीं इस कार्रवाई पर विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया- नैब इमरान खान की कठपुतली बन चुका है। हम इस तरह की हरकतों से डरने और दबने वाले नहीं हैं।''
 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए जाते वक्त गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, शाहिद खाकन अब्बासी प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए जा रहे थे। इस दौरान उनके साथ पीएमएल-एन के नेता अहसान इकबाल भी मौजूद थे। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एनएनजी केस में पहले नोटिस भेजा गया था, लेकिन वो ब्यूरों के सामने पेश नहीं हुए। उनसे मामले में करीबन 75 सवाल पूछे थे। जिसमें उन्होंने 20 के जबाव दिए। वहीं अब्बासी बार बार सवाल का जबाव देने के लिए और अधिक समय मांग रहे थे। 

पूर्व प्रधानमंत्री को नैब की तरफ से भेजे नोटिस में कहा गया था- ''हमारी गुजारिश है कि आप 18 जुलाई, 2019 को नैब इस्लामाबाद में सुबह 10 बजे जांच अधिकारी मलिक जुबेर अमहद के समक्ष हाजिर हों और एनएनजी टर्मिनल पर अपना बयान दर्ज कराएं।  इस नोटिस का पालन करने में विफल होने पर आपको नैब ऑर्डिनेंस 1999 के तहत निर्धारित नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।''

PREV

अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ग्लोबल इकोनॉमी, सुरक्षा मुद्दों, टेक प्रगति और विश्व घटनाओं की गहराई से कवरेज पढ़ें। वैश्विक संबंधों, अंतरराष्ट्रीय बाजार और बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठकों की ताज़ा रिपोर्ट्स के लिए World News in Hindi सेक्शन देखें — दुनिया की हर बड़ी खबर, सबसे पहले और सही तरीके से, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Recommended Stories

Top 10 Morning News: डिप्लोमैटिक हलचल से बाजार तक भारी उथल-पुथल, सुबह की 10 बड़ी खबरें
IT से Space तक दुनिया में छाया भारत, फिर भी पश्चिमी मीडिया क्यों दिखाता है ‘सपेरों का देश’?