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नोबेल पुरस्कार पाने वाले एशिया के पहले वैज्ञानिक थे सी. वी. रमन, जानें उनकी लाइफ के 5 फैक्ट्स

भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल प्राइज पाने वाले सी. वी. रमन का आज जन्मदिन है। इन्होंने प्रकाश को लेकर महत्वपूर्ण खोज की, जिसे रमन प्रभाव के नाम से जाना जाता है।

CV Raman was the first scientist in Asia to get Nobel Prize, learn 5 facts of his life
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New Delhi, First Published Nov 7, 2019, 11:58 AM IST
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करियर डेस्क। भारत के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तत्‍कालीन मद्रास प्रेसिडेंसी (तमिलनाडु) हुआ था। वे विख्यात भौतिक विज्ञानी थे। उन्‍होंने प्रकाश प्रकीर्णन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयोग किया। इससे पहली बार यह पता चला कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से होकर गुजरता है, तो उस दौरान प्रकाश की तरंग-दैर्ध्‍य में बदलाव दिखता है। इसी को रमन प्रभाव कहा जाता है। इस महत्‍वपूर्ण खोज के लिए 1954 में भारत ने उनको सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्‍न से नवाजा गया। 1917 में सरकारी नौकरी से इस्‍तीफा देने के बाद वह कलकत्‍ता यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हो गए। उसी दौरान उन्‍होंने कलकत्‍ता में इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्‍टिवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस) में अपना शोध कार्य किया। यहीं पर 28 फरवरी, 1928 को उन्‍होंने रमन प्रभाव की खोज की, जिसके लिए उन्हें 28 फरवरी, 1928 को भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया। आज जन्मदिन के मौके पर जानते हैं इनके जीवन से जुड़े 5 तथ्यों के बारे में।

1. सी. वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन (light scattering) के क्षेत्र में प्रयोग किया। उन्होंने वे प्रमाण प्रस्तुत किए जो प्रकाश की क्वांटम प्रकृति को साबित करते थे। उनका यह प्रयोग इतना महत्वपूर्ण था कि इसे रमन प्रभाव नाम दिया गया।

2. परमाणु नाभिक और प्रोटोन की खोज करने वाले वैज्ञानिक अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने साल 1929 में रॉयल सोसाइटी में अपने अध्यक्षीय भाषण में रमन के स्पेक्ट्रोस्कोपी का उल्लेख किया था। इसके लिए रॉयल सोसाइटी ने रमन को सम्मानित किया और उन्हें नाइटहुड की उपाधि दी गई।

3. सी. वी. रमन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई वैज्ञानिक थे।  

4. जब सी. वी. रमन से उनके प्रयोग की प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 1921 में जब वे यूरोप जा रहे थे तो भूमध्य सागर के जल के नीले रंग से बहुत प्रभावित हुए और इसके बाद ही प्रकाश के प्रकीर्णन के बारे में उन्होंने खोज शुरू की।

5. साल 1932 में सी. वी. रमन और सूरी भगवंतम ने क्वांटम फोटोन स्पिन की खोज की। इस खोज से प्रकाश की क्वांटम प्रकृति के सिद्धांत को एक और प्रमाण मिला। 

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