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बच्चे कतराते थे स्कूल आने से, टीचर ने घुमाई जादू की छड़ी और कर दिखाया यह कमाल

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और शिक्षकों में अक्सर काफी दूरी देखने को मिलती है और वह स्कूल आने पर भी कतराते हैं।

a teacher teaches in an innovative  techniques in a government school
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Ambikapur, First Published Aug 20, 2019, 4:42 PM IST
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अंबिकापुर(छत्तीसगढ़): कहा जाता है एक शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। इस कथन को छत्तीसगढ़ की एक शिक्षिका ने सच साबित किया है।  जिस स्कूल में बच्चे नियमित रूप में जाने से कतराते थे, वहां एक शिक्षिका की सूझ-बूझ स्कूल वहां की दिशा ही बदल दी। शिक्षिका ने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के जरिए पढ़ाना शुरू किया। इसके लिए टीचर ने खुद के वेतन से लैपटॉप तक खरीदा। शिक्षिका के पढ़ाने के इस तरीके से इलाके के बच्चों में स्कूल आने की ललक जगी है। जिले के सीतापुर स्थित आदर्शनगर मिडिल स्कूल की शिक्षिका ने अपने दम पर शिक्षा की नई राह दिखाई है। बच्चों के लिए यह शिक्षिका रोल मॉडल बन चुकी हैं।

सरकारी स्कूल, आधुनिक गतिविधियां

टीचर स्नेहलता ने स्कूल में आधुनिक तरीके से पढ़ाई शुरू कराई। इससे बच्चों में उत्साह आया। पहले जहां घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल के लिए बुलाना पड़ता था, वहीं अब बच्चे रोज खुद से ही स्कूल पहुंच जाते हैं। शिक्षिका ने बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाना शुरू और उनमें रूची पैदा होने लगी।  स्नेहलता पढ़ाने के लिए रोज नए-नए प्रयोग करती है। डांस, गाने के साथ-साथ कविता, कहानी लिखने की भी बच्चों में आदत डाली गई है। स्कूल का जो खाली वक्त बचता है उसमें बालश्रम, नशापान, जनजागरुकता जैसे समाजिक मुद्दों पर बच्चों से शॉर्ट प्ले करवाए जाते है। इन सब गतिविधयों के चलते अब यह सरकारी स्कूल किसी निजी स्कूल से पीछे नहीं है।

शिक्षिका को मिलें हैं कई सम्मान

कविता, गीत, गजल लिखने की शौकीन स्नेहलता को धमतरी में शिक्षक सम्मान मिल चुका है। सीतापुर में भी कई आयोजनों में वह सम्मानित हो चुकीं हैं। राजधानी रायपुर में आयोजित नवाचार प्रदर्शनी में भी उनको पुरस्कार मिला था।  स्नेहलता ने बताया कि स्कूल के बच्चे खेल में कराई जाने वाली पढ़ाई से प्रभावित हैं। खेल-खेल में शिक्षा बच्चों के लिए काफी फायदेमंद होती है और वह जल्दी सिखते हैं। किसी किसान की कहानी को पढ़कर सुनाने से बेहतर उन्होंने बच्चों को ही किसान और अन्य किरदार बनाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि, अपने-अपने किरदार में बच्चे जब इन कहानियों को पढ़ते हैं तो उनमें अलग भावना पैदा होती है। वह उस किरदार को जीते हैं। बच्चों के इस उत्साह को देखकर स्नेहलता में भी 
 हर रोज नया कुछ करने की कोशिश रहती है।

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