जुगनू, जो कभी रातों को रोशन करते थे, अब प्रदूषण और घटती हरियाली के कारण लुप्त होने के कगार पर हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के एक अध्ययन ने शहरी क्षेत्रों में जुगनुओं की घटती संख्या पर चिंता जताई है।

आपने जीवन में एक बार तो जुगनू को पकड़ने की कोशिश जरूर की होगी। इन्हें देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे आसमान के तारे जमीन पर आ गए हों। गांव में बच्चे आज भी जुगनुओं को देखकर बच्चे उसके पीछे भागते हैं। लेकिन एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदूषण और हरियाली कम होने के कारण इनका अस्तित्व कहीं खत्म होता जा रहा है। रात में चमकने वाले ये कीट अब कहीं लुप्त होते जा रहे हैं।

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लुप्त हो रही जुगनू

जुगनू मुख्य रूप से वनस्पति और छोटे कीटों को खाते हैं। इसके अलावा ये फल-सब्जियों को कीटों से बचाने का भी काम करते हैं। लेकिन अब इन जुगनुओं पर भी खतरा मंडरा रहा है। बढ़ते प्रदूषण के कारण इनका अस्तित्व कहीं गुम होता जा रहा है। भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) ने इस पर एक स्टडी की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने SGRR यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इस तरह का पहला रिसर्च पेपर पब्लिश किया है। इस शोध में पाया गया है कि शहरी इलाके में जुगनुओं की संख्या वन क्षेत्रों की तुलना काफी कम हो गई है। बढ़ता प्रदूषण और कम हरियाली इसके लिए जिम्मेदार हैं। इस शोध को देश के प्रतिष्ठित इंडियन फॉरेस्टर जनरल में पब्लिश किया गया है।

धीरे-धीरे लुप्त हो रही प्रजातियां

यह शोध हमें ये दिखाता है कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जुगनू जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त हो सकती हैं। इस शोध ने हमें ये एहसास दिलाया है कि प्रदूषण केवल हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रभावित करता है, जिसमें जुगनुओं जैसी कई प्रजातियां शामिल हैं। प्रदूषण और हरियाली कम होने की वजह से लोगों पर ये खतरा मंडरा रहा है। शहरी क्षेत्र में जुगनू की संख्या न के बराबर है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आगे आने वाली पीढ़ी जुगनुओं का सिर्फ नाम ही सुन पाएगी।

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