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12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है सोमनाथ, स्वयं चंद्रमा ने की थी स्थापना, अनेक बार टूटा और बना है ये मंदिर

First Published Feb 19, 2020, 3:23 PM IST
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उज्जैन. 12 ज्योतिर्लिगों के क्रम में पहला है सोमनाथ। ये मंदिर गुजरात के वेरावल बदंरगाह से कुछ ही दूरी पर प्रभास पाटन में स्थित है। शिवपुराण के अनुसार, इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं चंद्रमा ने की थी। चंद्रमा के द्वारा स्थापित किए जाने के कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा।

कैसे पहुंचें?
हवाई मार्ग: सोमनाथ से 63 कि.मी. की दूरी पर दीव एयरपोर्ट (Diu Airport) है। यहां तक हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं। इसके बाद रेल या बस की मदद से सोमनाथ पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग: सोमनाथ के लिए देश के लगभग सभी बड़े शहरों से ट्रेन मिल जाती हैं।

सड़क मार्ग: सोमनाथ सड़क मार्ग से सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। निजी गाड़ियों से भी सड़क मार्ग से सोमनाथ आसानी से पहुंचा जा सकता है।

चंद्रमा को मिली थी शाप से मुक्ति: धर्म ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं से करवाया था, लेकिन चंद्रमा अपनी पत्नियों में से सिर्फ रोहिणी को ही अधिक प्रेम करते थे। इस बात से क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय हो जाने का श्राप दे दिया। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा ने शिवलिंग की स्थापना की और तपस्या करने लगे। प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें श्रापमुक्त कर दिया। तभी से ये शिवलिंग यहां स्थापित है।

चंद्रमा को मिली थी शाप से मुक्ति: धर्म ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं से करवाया था, लेकिन चंद्रमा अपनी पत्नियों में से सिर्फ रोहिणी को ही अधिक प्रेम करते थे। इस बात से क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय हो जाने का श्राप दे दिया। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा ने शिवलिंग की स्थापना की और तपस्या करने लगे। प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें श्रापमुक्त कर दिया। तभी से ये शिवलिंग यहां स्थापित है।

यह तीर्थस्थान देश के प्राचीनतम तीर्थस्थानों में से एक है और इसका उल्लेख स्कंदपुराणम, श्रीमद्‍भागवत गीता, शिवपुराणम आदि प्राचीन ग्रंथों में भी है।

यह तीर्थस्थान देश के प्राचीनतम तीर्थस्थानों में से एक है और इसका उल्लेख स्कंदपुराणम, श्रीमद्‍भागवत गीता, शिवपुराणम आदि प्राचीन ग्रंथों में भी है।

ये मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। इसका शिखर 150 फुट ऊंचा है, जिस पर स्थित कलश का भार दस टन है।

ये मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। इसका शिखर 150 फुट ऊंचा है, जिस पर स्थित कलश का भार दस टन है।

इतिहासकारों की मानें तो इस मंदिर को 17 बार नष्ट किया गया और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया।

इतिहासकारों की मानें तो इस मंदिर को 17 बार नष्ट किया गया और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया।

माना जाता है कि सन 1026 में महमूद गजनी ने जो शिवलिंग खंडित किया था, वही आदि शिवलिंग था। मंदिर में फिर से शिवलिंग प्रतिष्ठित किया गया, जिसे 1300 में अलाउद्दीन की सेना ने खंडित कर दिया था। इस तरह खंडन और जीर्णोद्धार का सिलसिला चलता रहा।

माना जाता है कि सन 1026 में महमूद गजनी ने जो शिवलिंग खंडित किया था, वही आदि शिवलिंग था। मंदिर में फिर से शिवलिंग प्रतिष्ठित किया गया, जिसे 1300 में अलाउद्दीन की सेना ने खंडित कर दिया था। इस तरह खंडन और जीर्णोद्धार का सिलसिला चलता रहा।

बताया जाता है आगरा के किले में जो देवद्वार हैं, वे सोमनाथ मंदिर के ही हैं। इन्हें महमूद गजनी लूटपाट के बाद अपने साथ ले गया था और आगरा के किले में रखवा दिए थे।

बताया जाता है आगरा के किले में जो देवद्वार हैं, वे सोमनाथ मंदिर के ही हैं। इन्हें महमूद गजनी लूटपाट के बाद अपने साथ ले गया था और आगरा के किले में रखवा दिए थे।

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