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नवरात्रि 29 सितंबर से 7 अक्टूबर: जानें किस दिन देवी के कौन-से स्वरूप की पूजा करें

First Published Sep 28, 2019, 12:20 PM IST
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इस बार अश्विन मास की नवरात्रि 29 सितंबर से 7 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। इसे शारदीय नवरात्रि भी कहते हैं। इस नवरात्रि में रोज देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र में किस दिन देवी के कौन-से रूप की पूजा करें, जानिए

पहले दिन (29 सितंबर) करें मां शैलपुत्री की पूजा: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से   पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।

पहले दिन (29 सितंबर) करें मां शैलपुत्री की पूजा: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।

दूसरे दिन (30 सितंबर) करें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से   भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही सोचे गए सभी काम पूरा करने के लिए प्रेरणा मिलती है।

दूसरे दिन (30 सितंबर) करें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही सोचे गए सभी काम पूरा करने के लिए प्रेरणा मिलती है।

तीसरे दिन (1 अक्टूबर) करें माता चंद्रघंटा की पूजा: नवरात्रि का तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का   अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।

तीसरे दिन (1 अक्टूबर) करें माता चंद्रघंटा की पूजा: नवरात्रि का तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।

चौथे दिन (2 अक्टूबर) करें मां कूष्मांडा की आराधना: नवरात्रि के चौथे दिन की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। देवी कूष्मांडा रोगों को तुरंत नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु   को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है।

चौथे दिन (2 अक्टूबर) करें मां कूष्मांडा की आराधना: नवरात्रि के चौथे दिन की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। देवी कूष्मांडा रोगों को तुरंत नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है।

पांचवे दिन (3 अक्टूबर) करें स्कंदमाता की पूजा: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करती हैं। देवासुर संग्राम के   सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जानते हैं।

पांचवे दिन (3 अक्टूबर) करें स्कंदमाता की पूजा: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करती हैं। देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जानते हैं।

छठे दिन (4 अक्टूबर) करें मां कात्यायनी की उपासना: नवरात्रि के छठे दिन आदिशक्ति श्री दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न   होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं।

छठे दिन (4 अक्टूबर) करें मां कात्यायनी की उपासना: नवरात्रि के छठे दिन आदिशक्ति श्री दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं।

सातवे दिन (5 अक्टूबर) करें मां कालरात्रि की पूजा: महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां का यह स्वरूप काल का नाश करने वाला है, इसीलिए इन्हें कालरात्रि कहा जाता   है। शारदीय नवरात्रि के सातवे दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।

सातवे दिन (5 अक्टूबर) करें मां कालरात्रि की पूजा: महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां का यह स्वरूप काल का नाश करने वाला है, इसीलिए इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि के सातवे दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।

आठवें दिन (6 अक्टूबर) करें मां महागौरी की आराधना: नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का आठवां रूप श्रीमहागौरी हैं। देवी के इस स्वरूप का रंग अत्यंत गोरा   है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।

आठवें दिन (6 अक्टूबर) करें मां महागौरी की आराधना: नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का आठवां रूप श्रीमहागौरी हैं। देवी के इस स्वरूप का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।

अंतिम दिन (7 अक्टूबर) करें मां सिद्धिदात्री की पूजा: नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं।   सिद्धिदात्री के आशीर्वाद के बाद श्रद्धालु के लिए कोई कार्य असंभव नहीं रह जाता और उसे सभी सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

अंतिम दिन (7 अक्टूबर) करें मां सिद्धिदात्री की पूजा: नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं। सिद्धिदात्री के आशीर्वाद के बाद श्रद्धालु के लिए कोई कार्य असंभव नहीं रह जाता और उसे सभी सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

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