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सिर्फ 5 हजार रुपए में शुरू कर सकते हैं अच्छे मुनाफे वाला यह कारोबार, सरकार भी कर रही है मदद
बिजनेस डेस्क। कोरोनावायरस महामारी के इस दौर में लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। बहुत से लोगों की नौकरियां छूट गई हैं, वहीं वेतन और भत्तों में कटौती की जा रही है। भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में आर्थिक मंदी छा गई है। ऐसे में, हर कोई आमदनी का नया जरिया तलाश कर रहा है। कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें बहुत कम पैसा लगा कर भी नया कारोबार शुरू कर अच्छी कमाई की जा सकती है। जानें एक नए बिजनेस आइडिया के बारे में। अगर इसे अंजाम दिया जाए तो निश्चित सफलता मिल सकती है। (फाइल फोटो)

कुल्हड़ बनाने का कारोबार
देश में मिट्टी के कुल्हड़ों की भारी मांग है। ज्यादातर लोग प्लास्टिक के कप की जगह मिट्टी के कुल्हड़ में चाय, लस्सी या दूसरे ड्रिंक्स पीना पसंद करते हैं। लेकिन मिट्टी के कुल्हड़ों की जितनी डिमांड है, उतनी सप्लाई नहीं हो पाती। अगर कोई चाहे तो बेहद कम पूंजी से कुल्हड़ बनाने का कारोबार शुरू कर के अच्छा मुनाफा कमा सकता है।
(फाइल फोटो)
सरकार देना चाहती है बढ़ावा
प्लास्टिक के कप पर्यावरण के साथ ही हेल्थ के लिए भी नुकसानदेह हैं। प्लास्टिक के कपों में चाय पीने से कई केमिकल हमारे शरीर में चले जाते हैं, जिनसे कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है। इसलिए पर्यावरणविदों के साथ सरकार भी मिट्टी के कुल्हड़ों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है।
(फाइल फोटो)
सरकार कर रही है मदद
मोदी सरकार ने कुल्हड़ के निर्माण और इसके व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए कुम्हार सशक्तीककण की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार देशभर के कुम्हारों को बिजली से चलने वाला चाक मुहैया कराती है। इससे कुल्हड़ के अलावा मिट्टी के दूसरे बर्तन भी बनाए जा सकते हैं। सरकार बाद में कुम्हारों से तैयार कुल्हड़ सही कीमत पर खरीदती भी है।
(फाइल फोटो)
5 हजार की पूंजी से शुरू कर सकते कारोबार
कुल्हड़ निर्माण के कारोबार में ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं होती। महज 5 हजार रुपए से यह कारोबार शुरू किया जा सकता है। खादी ग्रामोद्योग आयोग ( KVIC) के चेयरमैन का कहना है कि केंद्र सरकार ने इस साल 25 हजार इलेक्ट्रिक चाक वितरित किया है।
(फाइल फोटो)
कितनी होगी कुल्हड़ से कमाई
मिट्टी का कुल्हड़ किफायती होने के साथ ही पर्यावरण के लिहाज से भी सुरक्षित होता है। फिलहाल, बाजार में चाय के कुल्हड़ का भाव 50 रुपए प्रति सैकड़ा है। लस्सी के कुल्हड़ की कीमत 150 रुपए प्रति सैकड़ा और मिट्टी की प्याली की कीमत 100 रुपए सैकड़ा है। अगर मांग बढ़ी तो इससे ज्यादा भी कीमत मिल सकती है।
(फाइल फोटो)
1000 रुपए रोज की हो सकती है बचत
बड़े शहरों में जिस तरह कुल्हड़ की मांग बढ़ती जा रही है, उसे देखते हुए इस बिजनेस में मुनाफे की काफी गुंजाइश है। इस बिजनेस की जानकारी रखने वालों का कहना है कि कुल्ड़ बनाने से लेकर अगर उसे थोक या रिटेल में बेचा जाए तो प्रोडक्शन के हिसाब से रोज 1000 रुपए की बचत हो सकती है।
(फाइल फोटो)
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