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MBBS डॉक्टर से कैसे एक लड़का बना IAS टॉपर, साझा किए निबंध से लेकर UPSC सवालों का सामना करने के जबरदस्त टिप्स

First Published Oct 4, 2020, 4:27 PM IST
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करियर डेस्क. Success Story Of IAS Anand Sharma: साल 2018 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा में टॉपर्स की सूची में नाम शामिल करने वाले आनंद शर्मा, आईएएस बनने से पहले एमबीबीएस डॉक्टर थे। उन्होंने साल 2015 में मुरादाबाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से एमबीबीएस किया और उसी के बाद से वे यूपीएससी सीएसई परीक्षा दे रहे थे। साल 2018 में 62वीं रैंक लाने वाले डॉ. आनंद शर्मा का यह चौथा प्रयास था। अगर मुख्यतः निबंध की बात करें तो साल 2016 में आनंद के निबंध में 123 अंक थे, 2017 में 135 और तीसरी बार जब वे टॉपर बने उस साल उन्होंने निबंध में 141 अंक पाए। इस प्रकार आप देख सकते हैं कि निबंध में हर साल उनके अंकों का ग्राफ बढ़ता ही गया। अपने अनुभव के आधार पर आनंद ने निबंध लेखन और सेलेक्शन के संबंध में कुछ टिप्स एक इंटरव्यू में शेयर किए हैं। आज जानते हैं कैसे इस महत्वपूर्ण परीक्षा में अच्छे अंक लाए जा सकते हैं- 

टॉपिक सेलेक्शन में न करें जल्दबाजी –

 

साक्षात्कार में बात करते हुए डॉ. आनंद कहते हैं कि सबसे पहले जब परीक्षा हॉल में आपके हाथ में पेपर आए तो निबंध लिखने में जल्दबाजी न करें। सभी विषयों को ध्यान से पढ़ लें और देखें कि आप किसमें सबसे अच्छा इनपुट दे सकते हैं। आनंद अपना केस बताते हैं कि वे पहले उन दो टॉपिक्स को हटाते थे जिनके फॉर या अगेंस्ट किसी में भी उनके पास प्वॉइंट्स नहीं होते थे। फिर बचे दो विषयों में से किसमें वे ज्यादा बेहतर कर सकते हैं यह तय करते थे और उसी को फाइनल कर देते थे।

टॉपिक सेलेक्शन में न करें जल्दबाजी –

 

साक्षात्कार में बात करते हुए डॉ. आनंद कहते हैं कि सबसे पहले जब परीक्षा हॉल में आपके हाथ में पेपर आए तो निबंध लिखने में जल्दबाजी न करें। सभी विषयों को ध्यान से पढ़ लें और देखें कि आप किसमें सबसे अच्छा इनपुट दे सकते हैं। आनंद अपना केस बताते हैं कि वे पहले उन दो टॉपिक्स को हटाते थे जिनके फॉर या अगेंस्ट किसी में भी उनके पास प्वॉइंट्स नहीं होते थे। फिर बचे दो विषयों में से किसमें वे ज्यादा बेहतर कर सकते हैं यह तय करते थे और उसी को फाइनल कर देते थे।

अगले स्टेप में वे एक रफ स्थान को चुनकर उसमें ऐस्से के फॉर और अगेंस्ट में उस समय उनके दिमाग में जो भी मुख्य बिंदु आते थे उन्हें लिख लेते थे। यह रफ काम होता था पर इसके आधार पर वे आगे उन बिंदुओं को एक्सप्लेन करते थे। कई बार जब आप फ्लो में लिखते चले जाते हैं तो प्वॉइंट्स भूल जाते हैं, इसलिए जिस समय दिमाग में जो आए, कहीं एक लाइन में लिख लें जिसे बाद में विस्तार दें।

अगले स्टेप में वे एक रफ स्थान को चुनकर उसमें ऐस्से के फॉर और अगेंस्ट में उस समय उनके दिमाग में जो भी मुख्य बिंदु आते थे उन्हें लिख लेते थे। यह रफ काम होता था पर इसके आधार पर वे आगे उन बिंदुओं को एक्सप्लेन करते थे। कई बार जब आप फ्लो में लिखते चले जाते हैं तो प्वॉइंट्स भूल जाते हैं, इसलिए जिस समय दिमाग में जो आए, कहीं एक लाइन में लिख लें जिसे बाद में विस्तार दें।

इंट्रोडक्शन, बॉडी, कॉन्क्लूजन 

 

निंबध के मुख्यतः तीन भाग होते हैं, इंट्रोडक्शन, बॉडी और कॉन्क्लूजन। अधिकतर कैंडिडेट्स इसी पैटर्न पर ऐस्से लिखते हैं। आनंद कहते हैं कि वे कोशिश करते थे कि इंट्रोडक्शन शुरू करते समय किसी कोट की मदद से आरंभ करें। कुछ मुख्य और प्रसिद्ध विषयों पर उन्होंने पहले से कोट्स तैयार करके रखे थे जिनका इस्तेमाल करके वे ऐस्से की शुरुआत करते थे।
 

इंट्रोडक्शन, बॉडी, कॉन्क्लूजन 

 

निंबध के मुख्यतः तीन भाग होते हैं, इंट्रोडक्शन, बॉडी और कॉन्क्लूजन। अधिकतर कैंडिडेट्स इसी पैटर्न पर ऐस्से लिखते हैं। आनंद कहते हैं कि वे कोशिश करते थे कि इंट्रोडक्शन शुरू करते समय किसी कोट की मदद से आरंभ करें। कुछ मुख्य और प्रसिद्ध विषयों पर उन्होंने पहले से कोट्स तैयार करके रखे थे जिनका इस्तेमाल करके वे ऐस्से की शुरुआत करते थे।
 

हालांकि अगर आपको किसी खास विषय पर कोट नहीं पता तो भी कोई समस्या नहीं है, आप किसी जानदार लाइन से शुरुआत कर सकते हैं। कोशिश करें कि शुरुआत प्रभावशाली हो। इसके बाद आनंद अगले स्टेप में एक पैरा में पूरे ऐस्से की समरी लिखते हैं। यह पैरा बताता था कि पूरे ऐस्से में वे क्या-क्या कहने वाले हैं।
 

हालांकि अगर आपको किसी खास विषय पर कोट नहीं पता तो भी कोई समस्या नहीं है, आप किसी जानदार लाइन से शुरुआत कर सकते हैं। कोशिश करें कि शुरुआत प्रभावशाली हो। इसके बाद आनंद अगले स्टेप में एक पैरा में पूरे ऐस्से की समरी लिखते हैं। यह पैरा बताता था कि पूरे ऐस्से में वे क्या-क्या कहने वाले हैं।
 

इसके बाद शुरू होता था मुख्य ऐस्से यानी बॉडी. इसमें आप अपने बिंदुओं के अनुसार फॉर और अगेंस्ट दोनों एंगल्स से लिखिए। बेहतर होगा कि फॉर में या अगेंस्ट में बोलते समय अपनी बात के सपोर्ट में उदाहरण देते चलिए। इससे आपकी बात को बल मिलता है। अगर यह उदाहरण रियल लाइफ के हों तो और अच्छा। इसके साथ ही आपके पास अपने विषय को लेकर फैक्ट्स, फिगर्स, एग्जाम्पल्स, कोट्स, डेटा, कोई घटना आदि जो भी उपलब्ध है सभी को डालते हुए निबंध को वजनदार बनाते हुए लिखिए।

इसके बाद शुरू होता था मुख्य ऐस्से यानी बॉडी. इसमें आप अपने बिंदुओं के अनुसार फॉर और अगेंस्ट दोनों एंगल्स से लिखिए। बेहतर होगा कि फॉर में या अगेंस्ट में बोलते समय अपनी बात के सपोर्ट में उदाहरण देते चलिए। इससे आपकी बात को बल मिलता है। अगर यह उदाहरण रियल लाइफ के हों तो और अच्छा। इसके साथ ही आपके पास अपने विषय को लेकर फैक्ट्स, फिगर्स, एग्जाम्पल्स, कोट्स, डेटा, कोई घटना आदि जो भी उपलब्ध है सभी को डालते हुए निबंध को वजनदार बनाते हुए लिखिए।

बैलेंस्ड अपरोच लेकर चलें –

 

निबंध लिखते समय बैलेंस्ड अपरोच लेकर चलें। हालांकि यह बहुत हद तक आपके चुने विषय पर निर्भर करेगा कि आप क्या लिखते हैं। ज्यादा प्वॉइंट्स फॉर में हैं या अगेंस्ट में लेकिन जिस भी तरफ आपके ऐस्से का झुकाव हो उसके विपरीत पहलू पर भी कुछ बिंदु जरूर लिखें। एक बात का और ख्याल रखें कि आप एक अधिकारी बनने के लिए यह परीक्षा दे रहे हैं, इसलिए केवल समस्या पर बात न करें बल्कि आपके हिसाब से जो भी संभावित समाधान हो, उसको जरूर मेंशन करें। ऐस्से का एंड हमेशा पॉजिटिव नोट पर करें और संभावित हल बताते हुए बात खत्म करें।
 

 

बैलेंस्ड अपरोच लेकर चलें –

 

निबंध लिखते समय बैलेंस्ड अपरोच लेकर चलें। हालांकि यह बहुत हद तक आपके चुने विषय पर निर्भर करेगा कि आप क्या लिखते हैं। ज्यादा प्वॉइंट्स फॉर में हैं या अगेंस्ट में लेकिन जिस भी तरफ आपके ऐस्से का झुकाव हो उसके विपरीत पहलू पर भी कुछ बिंदु जरूर लिखें। एक बात का और ख्याल रखें कि आप एक अधिकारी बनने के लिए यह परीक्षा दे रहे हैं, इसलिए केवल समस्या पर बात न करें बल्कि आपके हिसाब से जो भी संभावित समाधान हो, उसको जरूर मेंशन करें। ऐस्से का एंड हमेशा पॉजिटिव नोट पर करें और संभावित हल बताते हुए बात खत्म करें।
 

 

अंत में ऐस्से के लिए आनंद यही सलाह देते हैं कि बिना प्रैक्टिस करे यह पेपर देने न पहुंच जाएं जैसा कि उन्होंने पहली बार में किया था। पेपर के पहले कम से कम दस या पन्द्रह ऐस्से जरूर लिख लें। दूसरी मुख्य बात की विषय चुनने को लेकर जल्दबाजी न दिखाएं पहले रफ प्लान बना लें उसके बाद ही ऐस्से लिखना शुरू करें। 

अंत में ऐस्से के लिए आनंद यही सलाह देते हैं कि बिना प्रैक्टिस करे यह पेपर देने न पहुंच जाएं जैसा कि उन्होंने पहली बार में किया था। पेपर के पहले कम से कम दस या पन्द्रह ऐस्से जरूर लिख लें। दूसरी मुख्य बात की विषय चुनने को लेकर जल्दबाजी न दिखाएं पहले रफ प्लान बना लें उसके बाद ही ऐस्से लिखना शुरू करें। 

तीसरी अहम बात यह है कि अगर किसी विषय को घर से तैयार करके जाएं और उससे संबंधित विषय परीक्षा में आ जाए तो जो आता है उसे वैसा का वैसा छाप कर न आ जाएं। बल्कि पहले समय देकर यह समझ लें कि इस ऐस्से में क्या पूछा गया है, न की वह लिखने की हड़बड़ी में रहें जो आपको आता है। 

तीसरी अहम बात यह है कि अगर किसी विषय को घर से तैयार करके जाएं और उससे संबंधित विषय परीक्षा में आ जाए तो जो आता है उसे वैसा का वैसा छाप कर न आ जाएं। बल्कि पहले समय देकर यह समझ लें कि इस ऐस्से में क्या पूछा गया है, न की वह लिखने की हड़बड़ी में रहें जो आपको आता है। 

आनंद ने दूसरी बार में यही गलती की थी। क्या पूछा गया है वह लिखने के बजाय उन्होंने जो तैयार किया था वही लिख दिया था क्योंकि टॉपिक मिलता-जुलता आया था। कुल मिलाकर आपको विषय से नहीं भटकना है। अगर आप इन छोटी-छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे तो आपके निबंध में अच्छे अंक जरूर आएंगे। इससे आपकी ओवरऑल रैंक इम्प्रूव होने में भी बहुत मदद मिलती है।

आनंद ने दूसरी बार में यही गलती की थी। क्या पूछा गया है वह लिखने के बजाय उन्होंने जो तैयार किया था वही लिख दिया था क्योंकि टॉपिक मिलता-जुलता आया था। कुल मिलाकर आपको विषय से नहीं भटकना है। अगर आप इन छोटी-छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे तो आपके निबंध में अच्छे अंक जरूर आएंगे। इससे आपकी ओवरऑल रैंक इम्प्रूव होने में भी बहुत मदद मिलती है।

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