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मेरठ के लड़के ने बनाया पानी से चलने वाले कंप्यूटर, अमेरिका में प्रोफेसर बन ऐसे बढ़ाया देश का मान

First Published Jan 3, 2021, 6:05 PM IST
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करियर डेस्क. NRI Manu Prakash story: लेखक, वैज्ञानिक और कला-संस्कृति से जुड़े बहुत से भारतीय प्रवासियों को भारत का मान देश-विदेशों में बढ़ाने का श्रेय जाता है। हर साल नौ जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। दुनिया भर में बसे प्रवासियों से नाता जोड़ने के लिए प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। प्रवासी दिवस के मौके पर हम आपको दुनिया भर में हिंदुस्तान का मान बढ़ाने वाले NRI लोगों की कहानियां सुना रहे हैं। ये वो भारतीय प्रवासी हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत और ज्ञान के दम पर देश का नाम रोशन कर दिया। आज इनके टैलेंट को विदेश में सराहा जाता है। ऐसे ही एक NRI है मनु प्रकाश जिन्होंने पानी से चलने वाला कंप्यूटर बनाया है।  

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पले-बढ़े मनु अपने सुपर कूल आविष्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद वो अपने मास्टर्स और पीएचडी के लिए अमेरिका चले गए। मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड फिजिक्स में एमएस और पीएचडी के बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में असिसटेंट प्रोफेसर बन गए।
 

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पले-बढ़े मनु अपने सुपर कूल आविष्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद वो अपने मास्टर्स और पीएचडी के लिए अमेरिका चले गए। मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड फिजिक्स में एमएस और पीएचडी के बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में असिसटेंट प्रोफेसर बन गए।
 

मनु तब बहुत चर्चा में आए जब उन्होंने कागज का माइक्रोस्कोप बनाया था। करीब 70 रुपए कीमत वाले इनके बनाए माइक्रोस्कोप को मोड़कर जेब में भी रखा जा सकता है।

मनु तब बहुत चर्चा में आए जब उन्होंने कागज का माइक्रोस्कोप बनाया था। करीब 70 रुपए कीमत वाले इनके बनाए माइक्रोस्कोप को मोड़कर जेब में भी रखा जा सकता है।

यह इतना शक्तिशाली है कि कोई भी व्यक्ति इसकी सहायता से खून की एक बूंद में मलेरिया के जीवाणु को आसानी से देख सकता है।

यह इतना शक्तिशाली है कि कोई भी व्यक्ति इसकी सहायता से खून की एक बूंद में मलेरिया के जीवाणु को आसानी से देख सकता है।

इस माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल 135 से अधिक देशों में किया जा रहा है। वर्ष 2016 में अमरीकी सरकार से उन्हें करीब चार करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता मिली थी।
 

इस माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल 135 से अधिक देशों में किया जा रहा है। वर्ष 2016 में अमरीकी सरकार से उन्हें करीब चार करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता मिली थी।
 

उन्होंने साल 2014 में एक अद्भुत अविष्कार करके दुनिया को चौंका दिया। भारत के इस युवा साइंटिस्ट ने पानी से चलने वाले एक कंप्यूटर का आविष्कार किया। उन्होंने कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली एक घड़ी का अविष्कार किया। इस घड़ी को बनाने उन्होंने टिप-टिप होती पानी की बूंदों के अनोखे प्रयोग को अपनाया।

उन्होंने साल 2014 में एक अद्भुत अविष्कार करके दुनिया को चौंका दिया। भारत के इस युवा साइंटिस्ट ने पानी से चलने वाले एक कंप्यूटर का आविष्कार किया। उन्होंने कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली एक घड़ी का अविष्कार किया। इस घड़ी को बनाने उन्होंने टिप-टिप होती पानी की बूंदों के अनोखे प्रयोग को अपनाया।

अब तक उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं जिनमें गेट्स फाउंडेशन अवॉर्ड, इंडिया अब्रॉड फेस ऑफ द फ्यूचर अवॉर्ड, टेड सीनियर फेलो अवॉर्ड प्रमुख हैं।

अब तक उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं जिनमें गेट्स फाउंडेशन अवॉर्ड, इंडिया अब्रॉड फेस ऑफ द फ्यूचर अवॉर्ड, टेड सीनियर फेलो अवॉर्ड प्रमुख हैं।

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