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कैंसर से फैमिली में 2 लोगों की मौत के बाद शुरू की आर्गेनिक खेती, आज हेल्थ और पैसा दोनों से हैं धनी

First Published Feb 5, 2021, 10:14 AM IST
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इंसान जब किसी मुसीबत से जूझता है, तब उसके दिमाग में आइडियाज आते हैं। ऐसे ही एक आइडिया के बाद चर्चित किसान बने श्याम सिंह की कहानी आपको बताते हैं। यह उन लोगों के लिए प्रेरक है, जो खेती-किसानी में कुछ करना चाहते हैं। आत्मनिर्भर होना चाहते हैं। यूपी के शामली जिले के रहने वाले श्याम सिंह इन दिनों 10 एकड़ जमीन में फूड फॉरेस्ट के मालिक हैं। फूड फॉरेस्ट या फॉरेस्ट गार्डिंग यानी एक ही जगह पर अलग-अलग किस्म के प्लांट। श्याम सिंह अपने बगीचे में फल-फूल, सब्जियां-मसाल आदि पैदा करते हैं। इसे एडवांस फार्मिंग कहते हैं, जिसका प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन श्याम सिंह की कहानी की शुरुआत एक घटना के बाद हुई। वे बताते हैं कि 90 के दशक में उनके परिवार के दो लोगों की कैंसर से मौत हो गई थी। तब उन्होंने केमिकल युक्त फल-सब्जियां और अनाज खाने से तौबा कर ली। इसके बाद उन्होंने खुद आर्गेनिक फार्मिंग की तरह कदम बढ़ाया। श्याम सिंह पिछले 5 साल से आर्गेनिक फार्मिंग कर रहे हैं। इससे उन्हें सालभर में 10 लाख रुपए का मुनाफा हो रहा है। अपने पिता की सफलता से प्रेरित अब उनका बेटा अभय भी उनकी मदद करने लगा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाले अभय ने भी किसानी में करियर बनाने की ठान ली है।

श्याम सिंह पहले टीचर थे। लेकिन खेती-किसानी में उनका मन इतना रमा कि नौकरी छोड़कर पूरा समय इसको देने लगे। शुरू में उन्होंने परंपरागत तरीके से खेती-किसानी शुरू की। लेकिन बाद में एडवांस फार्मिंग को अपनाया।

श्याम सिंह पहले टीचर थे। लेकिन खेती-किसानी में उनका मन इतना रमा कि नौकरी छोड़कर पूरा समय इसको देने लगे। शुरू में उन्होंने परंपरागत तरीके से खेती-किसानी शुरू की। लेकिन बाद में एडवांस फार्मिंग को अपनाया।

श्याम सिंह बताते हैं कि उन्होंने 2017 में ऑर्गेनिक खेती अपनाई। उन्होंने फाइव लेयर मॉडल से शुरुआत की। यानी एक साथ पांच फसलों की खेती। वे फल-सब्जियां आदि उगाने लगे। अब उनके 21 वर्षीय बेटे अभय भी उनकी मदद कर रहा है। अभय ने 2019 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद गांव लौट आए।
 

श्याम सिंह बताते हैं कि उन्होंने 2017 में ऑर्गेनिक खेती अपनाई। उन्होंने फाइव लेयर मॉडल से शुरुआत की। यानी एक साथ पांच फसलों की खेती। वे फल-सब्जियां आदि उगाने लगे। अब उनके 21 वर्षीय बेटे अभय भी उनकी मदद कर रहा है। अभय ने 2019 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद गांव लौट आए।
 

श्याम सिंह के बगीचे में आज 5000 से अधिक पेड़-पौधे लगे हैं। वे कहते हैं कि एडवांस फार्मिंग से मुनाफा अच्छा होता है। श्याम सिंह के प्रोडक्ट्स अब खेत से सीधे बिकने लगे हैं। श्याम सिंह ने अब अपना खुद का फूड प्रोसेसिंग लगा लिया है। वे नींबू-आम का अचार बनाने लगे हैं।
 

श्याम सिंह के बगीचे में आज 5000 से अधिक पेड़-पौधे लगे हैं। वे कहते हैं कि एडवांस फार्मिंग से मुनाफा अच्छा होता है। श्याम सिंह के प्रोडक्ट्स अब खेत से सीधे बिकने लगे हैं। श्याम सिंह ने अब अपना खुद का फूड प्रोसेसिंग लगा लिया है। वे नींबू-आम का अचार बनाने लगे हैं।
 

श्याम सिंह बताते हैं कि आर्गेनिक फसल के प्रति अब लोगों का रुझान बढ़ रहा है। इसलिए बिक्री आसानी से हो जाती है। उनका बगीचा देखने दूर-दूर से लोग आते हैं और फार्मिंग के तौर-तरीके सीखते हैं। श्याम सिंह खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते। वे खाद में गुड़, बेशन, गोबर, गोमूत्र आदि मिलाते हैं। नीम और हल्दी के मिश्रण से कीटनाशक बनाते हैं।

श्याम सिंह बताते हैं कि आर्गेनिक फसल के प्रति अब लोगों का रुझान बढ़ रहा है। इसलिए बिक्री आसानी से हो जाती है। उनका बगीचा देखने दूर-दूर से लोग आते हैं और फार्मिंग के तौर-तरीके सीखते हैं। श्याम सिंह खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते। वे खाद में गुड़, बेशन, गोबर, गोमूत्र आदि मिलाते हैं। नीम और हल्दी के मिश्रण से कीटनाशक बनाते हैं।

श्याम सिंह दूसरे किसानों को भी फूड फॉरेस्ट के तौर-तरीके सिखाते हैं। वे कहते हैं कि काम कोई मुश्किल नहीं है, बस उसे तरीके से किया जाए। अगर कोई उनसे मदद लेना चाहे, तो फोन नंबर 9012300500 पर संपर्क कर सकता है।
(फोटो साभार: सोशल मीडिया)

श्याम सिंह दूसरे किसानों को भी फूड फॉरेस्ट के तौर-तरीके सिखाते हैं। वे कहते हैं कि काम कोई मुश्किल नहीं है, बस उसे तरीके से किया जाए। अगर कोई उनसे मदद लेना चाहे, तो फोन नंबर 9012300500 पर संपर्क कर सकता है।
(फोटो साभार: सोशल मीडिया)

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